
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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रक्तरंजित माटी
ले लहू का लाल रंग
पल-पल करती आक्रोशित
इंसानी मन
चंचलता वश डोलता मन
कभी करुण तो कभी क्रोधित
अलग समय पर
मन के भाव अलग
मन बदले पल-पल …
हर बदलते पल
राहें बदलती सोच की
सब निर्धारित करता है
अपना स्वयं का मन
जब सोचता है
सवार रहते हैं मन पर
भांति-भांति के वैचारिक भूत
चंद भूत
बाहर निकल आते हैं
अतीत के दड़बे से
कुछ भूत घूमते रहते हैं
इंसान के वर्तमान से
और… चंद काल्पनिक भूत
टपक जाते हैं भविष्य के
ऐसे में
उलझा रहता है इंसान
इन्हीं भूतों के गठबंधन में
फंसता जाता है पल-पल …
इंसानी कलेजे में
भँवर सा घूमता है
उफनती लहरों से
रचता रहता है
भूतों का अंतर्द्वन्द्व
अपना कपोल-कल्पित संसार
लोटपोट हो रहता
अपने ही भावों के बवंडर में
छटपटाता रहता है
अद्भुत मगर भयंकर
काल्पनिक मकड़जाल में
कसमसाता रहता है
जकड़ स्वयं को मर्यादाओं के
स्व निर्मित जंजीरों में
वो सक्षम होती है
चुपचाप बर्बाद करने को
ये वैचारिक भूतों का गठबंधन
मन को हर क्षण,
हर पल …
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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