
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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साहस रखिए उर सदा, श्रम को करिए नित्य।
लक्ष्य मिलेगा फिर मनुज, चमको बन आदित्य।।
चमको बन आदित्य, सत्य की पकडो डोरी।
दृढ़ निश्चय हो साथ, काम से मत कर चोरी।।
आलस को तू छोड़, बनोगे मानव पारस।
अपने मन को जीत, सदा उर रखिए साहस।।
बाधा सारी तोड़ कर, साहस से लो काम।
कर्मवीर आगे बढ़ो, होगा जग में नाम।।
होगा जग में नाम, तिलक लगता है माथा।
रिपु का करना नाश, विजय की फिर है गाथा।।
स्वयं गढ़ोगे भाग्य, भजो नित कृष्णा राधा।
रखो सदा विश्वास, तोड़ कर सारी बाधा।।
गाथा गाओ शोर्य की, गढ़ कर नूतन पाथ।
साहस से नित काम लो, धैर्य सदा हो साथ।।
धैर्य सदा हो साथ, गान आल्हा हो न्यारा।
जिसमें हो उत्साह, जीत लेता जग सारा।।
सत्पथ की हो चाह, विजय टीका है माथा।
मन हो उर्जावान, शौर्य की गाओ गाथा।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
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