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नीम का पेड़

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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हर साल की तरह
नवोदित हुई एक नई सुबह
ले आई जीवन का
एक नव वर्ष
नव चिंतन, नव मनन
ले नव आशाओं का दीप….

जलते ही आस-दीप
मानो सिमट गये हों
जीवन के अंधेरे
मगर
ये प्रकाश
उघाड़ गया जीवन के
प्रत्यक्ष-परोक्ष
तन, मन पर लगे
आघाती घावों को
एक पल खुशी हुई
अतीत के सुनहरे पल देख
तो कभी
व्यथित हुआ मन
छद्म हंसी के दुशाले के
आवरण में छिपे
रेशा-रेशा,
रिसते दर्दीले घावों को….

मगर
मन ने आज जाना
सच्चा साथी है कौन..?
वो है मेरा हम उम्र
दालान में खड़ा नीम का पेड़
जिसने पिया है छिप-छिप
मेरे तिक्त आँसूओ का जल
और.. बदलते कैलेंडर में भी
मुस्कुराता रहा है
और.. होने दिया खारा
अपने ही अस्तित्व को
मुस्कान स्वरूप रहा हरा-भरा…

साक्षी था
मेरे हर गुण-दोष रक्त के
ढक लेता था सब
अपने हरे पत्तों के जाल में
हरियाली की नम हवा से
शांत करता रहा
मेरे चेहरे पर उफनते क्रोध को
हर आवेग को
जीता रहा मेरे साथ हर स्पंदन को
शायद अंतिम घड़ी में
काम आ मित्रता निभाये
पहले स्वयं जल, जलाये मुझे
ऐसे ही आजीवन साथ निभाता
ये निष्कपट, निश्छल नीम का पेड़….!!

परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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