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एयर इंडिया की हवाई यात्रा

माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आपको परेशानी होगी. मैं हम दोनों के लिये इस बार फर्स्ट कलास का टिकट निकालता हूं। जरा वहां का माहौल भी देख लो। मैं उसकी बात सुन कर घबरा सी गई क्योंकि मुझे मालूम है कि फर्स्ट क्लास का टिकट और वो भी अंतरराष्ट्रीय काफी महंगा होता है। लेकिन मेरा बेटा जिद पर अड़ गया मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। मैंने कहा बेटा रेलवे में भी फर्स्ट क्लास सेकंड क्लास रहते है ना अब क्या विशेष है… वो बोला मां देख यह भी अनुभव होना चाहिए आप मुंबई तक आपको १ दिन से ज्यादा समय लगने वाला है इसलिए ये ठीक रहेगा।
आखिरकार यात्रा का दिन आ गया, समय के हिसाब से हम दोनों ही थ्रो पर पहुंचे, सारी औपचारिकताएं पूरी करके हम फर्स्ट क्लास के केबिन में प्रविष्ट हुए। अंदर का माहौल देखकर मैं हक्का-बक्का रह गई. सुंदर केबिन, स्वच्छ धुली हुई चादरें, स्वतंत्र रूप से टीवी, नई शॉल ओढ़ने के लिये. दो विभागों में सोने की आलीशान व्यवस्था। हमने जैसे ही अंदर प्रवेश किया ही दो युवा प्रसन्न चेहरे खाकर हमारे सामने हाथ जोड़कर बोले- मैडम सर हम जय-विजय समान आप दोनों की सेवा के लिए नियुक्त आप की खिदमत के लिए यहाँ पर सदैव उपस्थित रहेंगे। आपके खानपान मनोरंजन की व्यवस्था भी यथावत रहेगी। ओढ़ने की शॉल एक दम कोरी है, किसी भी बात की आवश्यकता पड़ी तो हम दोनों में से किसी को भी बुलाकर बुलाइएगा हम निसंकोच हाजिर रहेंगे।
बैठने-लेटने की व्यवस्था एकदम, आराम दायक थी ऊपर आकाश समान तेजस्वी सितारे जैसे चमचम करते छोटे-छोटे बल्ब दोनों के टीवी थोड़े बड़े साइज के थे अपनी रूचि अनुकूल चित्र पट देख रहे थे तुरंत दोनों के लिए गरमागरम पॉपकॉर्न के पुडे रखें गये, मजा आया। सेवा धर्मी लोगों में इतना आदर विनम्रता और शालीनता कर्तव्यनिष्ठा देखकर हम दोनों दंग रह गए हमें लगा हम हवाई जहाज में नहीं राजमहल में है जहाँ पर दो विनम्र सेवक हमारी सेवा के लिए हाजिर और क्या चाहेगा मानव इससे ज्यादा मेरे देश व मेरी नई पीढ़ी के व्यवहार में विनम्रता को देखकर मेरा मन प्रसन्न हुआ। भले ही वह फर्स्ट क्लास का टिकट था लेकिन मेरा मन आश्वस्त हुआ कि आज की युवा पीढ़ी कर्तव्यदक्ष है और अपने काम को गंभीरता से करती है। जय-विजय की जोड़ी हमारे साथ पूरी हवाई यात्रा में बनी और यथोचित सेवा भी की, भारत तेज गति से आगे बढ़ता युवा राष्ट्र है और उसके युवाओं पर मुझे गर्व है। नींद आने वाली है यह जान कर उन्होंने मुझे नई शाल ओढ़ा दी ….।

परिचय :-  माधवी तारे
वर्तमान निवास : लंदन
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
अध्यक्ष : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (लन्दन शाखा)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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