
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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रंगत तो पल में बदल जाए,
संगत जीवन गढ़ जाती है,
अच्छे लोगों की छाया में,
किस्मत भी मुस्काती है।
रंगत चेहरे की धूप-छाँव,
समय के संग ढल जाती है,
संगत सच्ची मिल जाए तो,
राह नई बन जाती हैl
रंगत बाहरी चमक-दमक,
मन को कहाँ सजाती है,
संगत सच्ची हो अगर,
आत्मा भी महक जाती है।
रंगत झूठी दिखावा है,
जो क्षण भर में मिट जाती है,
संगत सच्ची दीपक बन,
हर अंधेरा हर जाती है।
रंगत से मत धोखा खाना,
यह तो आँख भरमाती है,
संगत की पहचान करो,
यही राह दिखलाती है।
रंगत से रिश्ते ना जोड़ो,
ये अक्सर टूट जाते हैं,
संगत सच्ची निभ जाए तो,
जीवन फूल खिलाते हैं।
रंगत चाहे जैसी हो,
दिल को क्या समझाती है,
संगत अच्छी हो तो जीवन,
खुशियों से भर जाती है।
रंगत के पीछे भागे जो,
अक्सर पछताते हैं,
संगत सही चुनने वाले,
मंजिल तक जाते हैं।
रंगत तो मौसम जैसी है,
आती-जाती रहती है,
संगत सच्ची हो तो जीवन,
हर पल मुस्कुराती रहती है।
रंगत से अधिक संगत को,
संभालो ये ही ज्ञान है,
सच्चे साथी मिल जाएं तो,
जीवन ही वरदान है।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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