
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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युद्ध
होते आयें हैं
इतिहास गवाह है
होते आयें हैं
युगों-युगों से युद्ध
इतिहास का
प्रत्येक पन्ना भरा है
रक्त रंजित करते धरा को
युद्धों से
विध्वंस का द्योतक है युद्ध
माना… कि… विध्वंस
स्वयं में सृजक होता है
मगर….भंयकर पीड़ा
अपने में समेटे होता है युद्ध….
लाशें बिखरती है
चहुँ और धरा पर
इन सामरिक युद्धों में
न जाने उजड़ते हैं
कितने घर-परिवार
खंडित होते हैं
अनगिन रिश्ते युद्धों में
रामायण… महाभारत…
और न जाने कितनी
परिचायक घटनायें युद्धों की….
मगर
एक युद्ध और होता है
कहलाता है मानसिक युद्ध
यहाँ शत्रु नहीं होते बाहरी
पर
दुश्मन इंसान के होते हैं
भीतरी स्वयं के विकार
झूझती है आत्मा
स्व-निर्मित वैचारिक जाल में
माध्यम बनते हैं
काम, क्रोध, लिप्सा, अहम्
न तलवार, न गोली
पर तिल तिल मरती है आत्मा
इन विकार के शत्रुओं से…..
मन लड़ता है
बचाने को अपना अस्तित्व
दोनों ही “फ्रंट” पर
घाव भर जाते हैं
पर निशान छोड़ जाते हैं देह पर
ये सामरिक युद्ध
परंतु
हरे भरे रहते हैं आजीवन
टीस मारते हैं उम्र भर
रिसता रहता है दर्द
घावों से….
जो मिलते हैं मानसिक युद्घ से….
कहने को तो इन्सान
पुजारी है अहिंसा का
उपासक शांति का
मगर
गौण रहते हैं सब
स्व-महत्वाकांक्षा के सामने
अभिलाषाओं की पूर्णाहुति के लिए
अति सयाना…. बुद्धिजीवी…
स्वयं घड़ता है
दोनो ही प्रकार के युद्ध
कौन बचाये.. कैसे बताये
विभीषिका से
इन स्व-निर्मित युद्धों के जाल से…!
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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