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सियान बबा

प्रीतम कुमार साहू ‘गुरुजी’
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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(छत्तीसगढ़ी बोली)

पहुँना के संदेशा देय कउँवा हर उड़ागे।
बड़े-छोटे के नाता ल मनखे हर भुलागे।।

घर के सियान बबा के कोनों नइ सुनय।
सुन घलों लिहि त कोनों नइ गुनय।।

मनखे हर मनखे ले आज दूरिहा होगे।
बेईमानी के कमाई आय के जरिया होगे।।

बबा संग ठिठोली करइया कोनो नइ हे।
सगा बरोबर अब तो कुरूर करिया होगे।।

जुन्ना जिनिस आज फिर ले नवा होगे।
खातिरदारी म जरूरी मंद महुँवा होगे।।

बबा के गोहार ल आज कोनो नइ सुनय।
कान रहिके मनखे हर आज कनवा होगे।।

परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक)
निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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