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आदमी के भीतर

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
करनाल (हरियाणा)

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आदमी के भीतर
एक और आदमी रहता है।

वह बाज़ार नहीं जाता,
न किसी पद की इच्छा करता है।

वह बस चाहता है
कि दुनिया थोड़ी कम कठोर हो।

लेकिन समय की धूल
उसके चेहरे पर जमती रहती है।

और एक दिन
बाहर वाला आदमी सफल हो जाता है,

पर भीतर वाला
चुपचाप मर जाता है।

परिचय :-  सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
जन्म : २१ जून १९९५
निवासी : ग्राम बुटाना, जिला जिला करनाल (हरियाणा)
प्रकाशित कृतियां : हिंदी कहानी पुस्तक “प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना)”, हरियाणवी कविता संग्रह “समाज” शामिल हैं।
रुचि : हिंदी एवं हरियाणवी भाषा में काव्य लेखन के साथ पटकथा लेखन, संवाद लेखन तथा स्वतंत्र फिल्म निर्देशन में भी रुचि रखते हैं।
विशेष : आपकी रचनाओं के केंद्र में मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण जीवन, करुणा, पर्यावरण और समकालीन चिंतन प्रमुख रूप से रहते हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष २०१६ में प्रकाशित कविता “एक नज़र” के लिए उन्हें भारतीय दलित साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त हुआ।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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