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अमराई की छाँव

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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अमराई की छाँव सुहाती,
मृदु अहसास कराती।
शीतलता देकर के हमको,
भावों में ले जाती।
तपन भले ही पीड़ादायक,
पर अमराई भाये,
मोहक छाँव मनुज के तन को,
राहत से सहलाती।।

अमराई की छाँव स्वर्ग-सी,
सपनों में ले जाती।
मधुर हवा तो गीत सुनाकर,
सबको है दुलराती।
मौसम को खुशहाल बनाती,
मस्ती को है देती,
बहुत सुहानी होती छैयाँ,
मंगल भाव सजाती।।

अमराई की छाँव खोजकर,
सीखो समय बिताना।
खुशियों से दामन को भरकर,
उत्फुल्लित हो जाना।
अमराई की बात निराली,
आकर्षण यौवन पर,
हरियाली से नेह लगाकर,
उसके ही हो जाना।।

परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/प्रभारी प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
प्रकाशित रचनाएं व गतिविधियां : पांच हज़ार से अधिक फुचकर रचनाएं प्रकाशित
प्रसारण : रेडियो, भोपाल दूरदर्शन, ज़ी-स्माइल, ज़ी टी.वी., स्टार टी.वी., ई.टी.वी., सब-टी.वी., साधना चैनल से प्रसारण।
संपादन : ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं/विशेषांकों का सम्पादन। एम.ए.इतिहास की पुस्तकों का लेखन
सम्मान/अलंकरण/ प्रशस्ति पत्र : देश के लगभग सभी राज्यों में ७०० से अधिक सारस्वत सम्मान/ अवार्ड/ अभिनंदन। म.प्र.साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी अवार्ड (५१०००/ रु.)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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