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स्वप्न सुख

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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सपनों का अपना अहसास होता है
इसीलिए ये असल से खास होता है

रोकेगा कौन दिल को झूमने से
रोकेगा कौन लबो के चूमने से
हवायें चले या ना चले मगर
मादकता का मन अहसास होता है

कोई मौसम नहीं कलियाँ फूटने का
कोई वक्त नहीं कोयल कूकने का
जिस वक्त भी मन करे अपना
सुर संगीत का आगाज होता है

बिन मौसम बादल गरजते हैं
गौरी खड़ी सामने वे बरसते हैं
भिगो जाते प्रिये की कोमल काया
संग भीगें, अंदाज अलग होता है

मिल लेते हैं बेझिझक सपनों में
मन खोया रहे प्रीत के सपनों में
वास्तव में क्या होगा, कौन जाने
यहां मन चाहा मिलाप होता है

सुख ही सुख, कहां दुख सपनों में
ना अलगाव की चर्चा है अपनो में
हकीकत में नहीं, सपनों में ही सही
अरमान पूराने का अहसास होता है

परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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