
ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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बस, रेल, टेक्सी और हवाई जहाज
गूंजती चहुंओर, यात्रियों की आवाज,
हर तरफ खचाखच भीड़-भाड़, बेशुमार
करते जल्दबाजी यात्री, हो जाते सवार
स्टेशन, बस अड्डे, हल्ला-गुल्ला और शोर
निर्धारित स्थान में पहुंचने की लगती होड़,
हाथ में, तो कंधे में ले कीमती सामान
दौड़-भाग में घिर, यात्रा बनाते आसान
अकेले में, समूह में, सपरिवार संग,
कोई बेसहारा, कोई असहाय निर्धन,
यात्रा करते करते, जीत लेते यात्री मन
मेल-मिलाप कर लेते यात्री खूब व्यापक
दुःख-दर्द छँटकर खुशी बढ़ती व्यापक
बातों ही बातों में दूर हो जाता, संकोच
मनोबल बढ़ता शर्म खुलती निसंकोच
बढ़ती यात्रियों में दुगनी नई उमंग सोच
यात्री बन जाता घुलमिलकर सहयात्री
लम्बी यात्रा का आनंद उठाते सहयात्री
खुशनुमा आंनद भरा गहरा आनन्द पाते
एक दूसरे बनते पूरक, घनिष्ठता बढ़ाते
सहयात्री का सुहावना सफर कट जाता
सहयात्री में मधुरता का बीज उग आता
सहयात्री का बढ़ता सम्बन्ध बेहिसाब
सहयात्री की यात्रा बनती लजबाव
कोई व्यापार, रोजगार, घूमने-फिरने,
तीर्थंस्थल, पर्यटनस्थल का मूल यात्री
सहयात्रियों की यात्रा में जलती बाती
कोई भुखमरी में, तो न जाने कई गम में,
तमाम सुख संसधानों में तो अपने दम में
उमंग उत्साह में,उदासीन यात्रा के संग में
अमीर-गरीब के भेदभावरहित यात्रा
सहयात्री बनकर दिखती मिसाल आभा
परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
