
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
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पहली वारिश और ये हाल
हर ओर सुनाई
पड़ रहा त्राहि माम
बेचारा यमराज है परेशान
लोग उसे बेवजह
कर रहे बदनाम।
सुनकर उसे भी गुस्सा आया
जोर से भन्नाया-इज्जत
का फालूदा बनाया।
कहने लगा- ये सब
विकास की माया है
कमीशन जमकर
खाया गया है।
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
नदी, नाले, तालाबों
पर अतिक्रमण
अनियोजित शहरीकरण,
गाँवों से पलायन
आधुनिकता की आँधी
और नित नव
सुविधाओं का लोभ
बढ़ता प्रदूषण,
बिगड़ता मौसम चक्र
ऊपर से स्वार्थ, लोभ की
विकृति मानसिकता
मरती संवेदनाएं,
जहरीली होती
भाव-भंगिमाएं
यही है आज का
मानव समाज।
बदले में रोता है,
खूब खोता है,
जो बोता है, वही
तो काटता है
फिर भी जमकर
अफसोस करता
और घड़ियाली
आँसू बहाता है,
मगर खुद को
बदलने का विचार
भूलकर भी मन में
नहीं लाता है,
बस! दोष पर दोष
सिर्फ औरों को देता है।
इस लिस्ट में मेरा
नाम भी आज आ गया
जिसका मलाल मुझे
बिल्कुल नहीं है,
क्योंकि आज का
तथाकथित मानव
तो ईश्वर पर भी नित
नये आरोप जड़ता है
उन्हें भी अक्सर
बदनाम करता है,
खुद को बड़ा
विकास पुरुष कहता है,
और गली, मुहल्ले,
कस्बे, शहरों की छोड़िए
सड़कों पर भरे पानी में भी
तैरने का अभ्यास
करने लगता है,
आगामी ओलम्पिक
में मैडल पाने के
खूबसूरत सपने संजोता है,
अंत में वारिश, यमराज
और ईश्वर को बदनाम कर
अपने अपने आँसू पोंछकर
सब भूल जाता है।
परिचय :- सुधीर श्रीवास्तव
जन्मतिथि : ०१/०७/१९६९
शिक्षा : स्नातक, आई.टी.आई., पत्रकारिता प्रशिक्षण (पत्राचार)
पिता : स्व.श्री ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव
माता : स्व.विमला देवी
धर्मपत्नी : अंजू श्रीवास्तव
पुत्री : संस्कृति, गरिमा
संप्रति : निजी कार्य
विशेष : अधीक्षक (दैनिक कार्यक्रम) साहित्य संगम संस्थान असम इकाई।
रा.उपाध्यक्ष : साहित्यिक आस्था मंच्, रा.मीडिया प्रभारी-हिंददेश परिवार
सलाहकार : हिंंददेश पत्रिका (पा.)
संयोजक : हिंददेश परिवार(एनजीओ) -हिंददेश लाइव -हिंददेश रक्तमंडली
संरक्षक : लफ्जों का कमाल (व्हाट्सएप पटल)
निवास : गोण्डा (उ.प्र.)
साहित्यिक गतिविधियाँ : १९८५ से विभिन्न विधाओं की रचनाएं कहानियां, लघुकथाएं, हाइकू, कविताएं, लेख, परिचर्चा, पुस्तक समीक्षा आदि १५० से अधिक स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। दो दर्जन से अधिक कहानी, कविता, लघुकथा संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन, कुछेक प्रकाश्य। अनेक पत्र पत्रिकाओं, काव्य संकलनों, ई-बुक काव्य संकलनों व पत्र पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल्स, ब्लॉगस, बेवसाइटस में रचनाओं का प्रकाशन जारी।अब तक ७५० से अधिक रचनाओं का प्रकाशन, सतत जारी। अनेक पटलों पर काव्य पाठ अनवरत जारी।
सम्मान : विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा ४५० से अधिक सम्मान पत्र। विभिन्न पटलों की काव्य गोष्ठियों में अध्यक्षता करने का अवसर भी मिला। साहित्य संगम संस्थान द्वारा ‘संगम शिरोमणि’सम्मान, जैन (संभाव्य) विश्वविद्यालय बेंगलुरु द्वारा बेवनार हेतु सम्मान पत्र।
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