
प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
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धागे का बंधन पक्का है,
भाई उसमें बंध जाता है।
जब बहना की साड़ी खिंचती,
साड़ी में वो समा जाता है।
धागे का …
बहने सावन भर भोले को,
जल अर्पित कर शक्ति पाती।
भाई कर पर बांध के राखी,
बहने उसका भाग्य जगाती।
भाई इस पवित्र बंधन पर,
समय पड़े तो लुट जाता है।
धागे का …
जो सक्षम हैं बहनों को वे,
ये पुनीत अवसर देते हैं।
मोदी, योगी इस पुनीत दिन,
बहनों का आशीष लेते हैं।
सैनिक भी राखी बंधवाकर,
रक्षा हेतु खड़ा रहता है।
धागे का …
इस पवित्र त्यौहार को हिंदू,
पूरी निष्ठा से हैं मनाते।
बनते हैं पकवान अनेकों,
बहिन और भाई मिलकर खाते।
बहन ने राखी बांधी जिसको,
वो रक्षक बनकर रहता है।
धागे का…
परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा
निवास : जानकीपुरम (लखनऊ)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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