
संजय कुमार नेमा
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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अज्ञान-तिमिर में डूबी धरा को,
प्रज्ञा की ज्योति से अलख जगा दो।
कण-कण में बसी चेतना,
उसे सत्य-मंत्र से महका दो।
जो भाव छुपा है हृदय-तल में,
उसे प्रेम-सुधा से सजा दो।
ईर्ष्या, घृणा, द्वेष की कालिख को,
करुणा-नीर से धो, बहा दो।
सौहार्द, एकता, बंधुत्व का,
अमृत-घृत हर दीप में मिला दो।
शब्दों में शक्ति भरें,
हर वाणी को महामंत्र बना दो।
सत्य जहाँ मौन पड़ा हो,
वहाँ धर्म का शंख बजा दो।
न कोई बैरी, न कोई पराया,
सब में अपना रूप दिखा दो।
अंधकार मिटाकर,
हर हृदय में ज्ञान द्वीप
का उजियारा कर दो।
परिचय :- संजय कुमार नेमा
निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश)
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