
इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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चुनाव आया, मौसम बदला,
नेता जी का चेहरा चमका।
कल तक जनता याद न थी,
आज हर घर में रिश्ता पक्का।
हाथ जोड़कर नेता बोले
“आप ही मेरे माई-बाप!”
पाँच साल तक फोन न उठाया,
अब रोज़ पूछें—“कैसे हैं आप?”
घोषणाओं की ऐसी बारिश,
बादल भी शरमा जाएँ,
हर गली में पुल बन जाएँगे,
बस नदियाँ खोजी जाएँ।
बेरोज़गार को नौकरी देंगे,
किसान की किस्मत बदलेंगे,
महँगाई को दूर भगाकर
सपनों में भी दाम घटेंगे।
भाषण में बिजली चौबीस घंटे,
सड़कें होंगी चकाचक,
नेता जी के भाषण सुनकर
जनता बोले“वाह! क्या पटकथा!”
पोस्टर में मुस्कान बड़ी है,
वादों का आकार निराला,
वोट पड़ते ही जनता ढूँढे
“अरे, नेता जी कहाँ गए भला?”
फिर पाँच बरस बाद अचानक
फिर से दर्शन हो जाते हैं,
जो कल तक थे “जनसेवक”,
आज फिर “सेवक” हो जाते हैं।
जनता भी कमाल की निकली,
हर बार नया सपना चुनती है,
वोट की उँगली सूखने से पहले
अगली उम्मीद बुनती है।
लोकतंत्र का खेल निराला
सबकी अपनी-अपनी चाल,
जनता राजा कहलाती है,
फिर भी पूछे“मेरा क्या हाल?”
परिचय :- इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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