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स्वदेश प्यार

सत्येन्द्र कुमार सिंह ‘सहज’
बलिया (उत्तरप्रदेश)

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कहां है स्वदेश प्यार?
कहां है मानव प्यार?
कहां हैं अमर क्रांतिकारी?
कहां है मानव सेवा
की क्यारी?
कहां की धरती जग
में न्यारी?
कहां की धरती जग
में प्यारी?
कहां हैं पावन सीता
सी नारी?
कहां है धर्म ज्ञान
की पिटारी?
कहां है वीरों की
फुलवारी?
कहां वेद की ऋचाएं
नित गूंजती हैं?
कहां दुनिया पेड़
पौधों को पूजती है?
कहां गो पालन
एक बड़ा व्रत है?
कहां हो रहा विकास
अनवरत है?
कहां हैं शिवा,
प्रताप और छत्रसाल?
किसका हृदय है
समंदर सा विशाल?
किसके हृदय में आता
विश्व प्रेम का उछाल?
कहां हैं हमारे धर्म पाल?
कहां है उन्नत भाल?
कहां है बल अपरंपार?
कहां गूंजता सदा
मंत्रोच्चार?
कहां गूंजता शक्ति
का जय-जयकार?
कहां अटल संकल्प संबल है?
कहां वेद, पुराण का बल है?
कहां गूंजते गीता के
अमर स्वर हैं?
पहले कहां उगते
भगवान भास्कर हैं?
कहां राणा प्रताप,
शिवा का बल है?
किसके बांहों में मारूत,
गरूड़ गजराज का बल है?
कहां साहस, सत्य का संबल है?
यहां हमारे हृदय स्थान में
यहां हमारे हिंदुस्तान में।

परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह ‘सहज’
निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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