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 आशियाना तिनका का 

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव

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मालुम है ये शाख हि जमीन है मेरी और एक दिन काट दि जाएगी,
मरने से पहले मरना और हारने से पहले हारना फितरत नही हमारी,
जा रहा हुँ उस तूफ़ान से आंख में आंख मिलाने को,
मैं तिनका – तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को।
भरोसा अपने पंखों पर बनता और बिगड़ता रहता है,
मगर ये तमाशा जिंदगी भर यूँही चलता रहता है,
जितनी अंबर बक्शी है तुने काफी है उड़ान भरने को,
मैं तिनका – तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को।
ये जो पतझड़ है मौसम हि तो है ऐसे हि बदलते रहेंगे, इन्तेजार
क्यों बसन्त और बहार का बदलना तो तेरे मिजाज से सिख लिया,
तु कुछ कहे या मैं कुछ कहुँ अब दौड़ नही कुछ भी आजमाने को,
मैं तिनका – तिनका जोडूं एक आशियाना बनाने को।
चाँद थोड़ा धुंधला गया है अब केह- कहे युहीं लगते रहेंगें,
अहम कि बातें थी ये सब वख्त ने चश्मा साफ कर दिया,
अब धुल हाथों में नहीं लुँगा आसमां कि तरफ उड़ाने को,
मैं तिनका – तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को।
ये शर्तों कि जिंदगी कश्मकश में पिघल रही है,
और हमे मालुम है मेरे दाता ये सांसे किश्तों में मिल रही है,
देखे जमाना एक जुगनू भी काफी है अंधियारा भगाने को,
मैं तिनका – तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को।
नुमाया क्या मैं करूँ क्या खोया और क्या पाया का,
ना गिला और न सिकवा कि तूने मुझे बनाया क्या,
अब तो लोहा है तेरे पिंजड़े से अपनी अस्मिता दिखाने को,
मैं तिनका – तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को।

लेखक परिचय :- 
नाम : ईन्द्रजीत कुमार यादव
निवासी : ग्राम – आदिलपुर जिला – पटना, (बिहार)

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