आओ साथ बैठते हैं
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
********************
आओ साथ बैठते हैं
ना हो कोई भीड़
ना कोलाहल,
श्वेत श्याम चित्रों में
रंग भरते हैं
चाय की प्याली
हाथों में लेकर
चलचित्र सी बीती
जिंदगी को पुनः
सिलसिलेवार करते हैं
उम्र के ढलते पडाव पर
स्वयं की अभिव्यक्ति से
सरोकार करते हैं
जीवन आनंदमय था
या थी दुःख की बदली,
क्यूँ हम उस पल को
याद करते हैं
हम स्वयं ही अपनी
देखभाल करते हैं!
बच्चे बड़े हो गए
उनको उड़ना
हमने ही सिखाया, वो
ऊंची उड़ान भर
सुनहरे भविष्य का
सपना साकार करते हैं,
सृष्टि ने अद्भुत
उपहार दिए हर रंग
हर रूप में इस जग को
उनके संरक्षण का प्रण लेते हैं
हम ही पुराने मित्रों को
फिर से नया संदेश भेजते हैं!!
परमेश्वर के
श्री चरणों में नमन कर,
जनकल्याण का
आशीष लेते हैं,
जीवन जीने की कला
का पुनः निर्माण करते हैं
आओ पास बैठ...






















