माँ कृपा
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
********************
माँ कृपा बड़ी निराली है
करो समर्पण फिर
जिंदगी में खुशहाली है
भले ही माँ भूखी रह जाती है
मुझे आई तृप्ति की डकार से
माँ संतुष्ट हो जाती है।
संसार में माँ ही शक्तिशाली है
बिन माँ के दुनिया की बदहाली है
माँ रातो को लोरिया सुनाती है
नींद में मीठे सपनो को बुलाती है।
कभी नींद में हँसाती
गालो में गड्डे बनाती है
जब जब माँ की याद आती है
सुबह मीठी आवाज में उठाती है।
माथे को चुम कर
बालो को सहलाती है
स्वर्ग धरा पर बनाती है
माँ का कृपा बड़ी निराली है
करो समर्पण फिर
जिंदगी में खुशहाली है।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निर...
























