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हिंदी हिन्द की पहचान
कविता

हिंदी हिन्द की पहचान

सौरभ डोरवाल जयपुर (राजस्थान) ******************** हिंदी हिन्द की पहचान, हिन्दोस्तां की आन, बान और शान।। संस्कृत की छोटी बहन, सभी भाषाओ की मौसी है कहलाती, हिन्दुस्तान की सभी क्षेत्रीय भाषाएँ हिन्द की गोद में ही आश्रय पाती।। हिंदी ने जोड़ा सभी भाषाओ को, माला के मोतियों के जैसे, बिना हिंदी भारत की कल्पना कैसे हो सकती है वैसे ? हिंदी भारत का अभिमान है, हिंदी ही काव्य का प्राण है।। परिचय : सौरभ डोरवाल निवासी : भोजपुरा, जिला- जयपुर (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपन...
अनमोल जीवन
कविता

अनमोल जीवन

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** यह जीवन बड़ा अनमोल है, पुण्य कर्मों का मेल है, जीने की यही तमन्ना है कुछ कर गुजरने की मंछा है। काम कुछ करना है नाम कुछ करना है, व्यर्थ ना चले जाए नहीं तो हाथ मिलना है, मैं कुछ ऐसा लिखूं जो इतिहास बन जाए, इतिहास के पन्नों पर नाम अमर हो जाये, मुझे तो जिंदा रहना है। शिक्षा गरीबी नारी पीड़ा समाज सुधार पर बात बने, मै नींव का पत्थर बन जाऊं, दबकर भी कुछ करना है, मुझे तो जिंदा रहना है। राजनीति नहीं मेली हो, भ्रष्टाचार का नाम ना हो, मेरी कलम भी तलवार बन जाये, कुछ करके मुझको जाना है, मुझे तो जिंदा रहना है। प्रभु सेवा यहाँ सब कुछ है, हर क्षण हर सांस में तेरा डेरा हो, आत्म कल्याण का मार्ग बने, ऐसा मन में बसेरा हो, मुझे तो जिंदा रहना है। नहीं देश-विदेश में जंग रहे, शांति का सदा उल्लास रहे, जीव...
शिव-शक्ति संकल्प
स्तुति

शिव-शक्ति संकल्प

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** शिवालयों से शंखनाद हुआ, गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन, शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन, और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव, काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें, संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो, जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता, काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग ...
नया साल
कविता

नया साल

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** अमीर-अमीर होते जाएंगे और गरीब और भी ज्यादा गरीब, भरमाया मस्तिष्क कहेगा है ये हमारा नसीब, नहीं बदलेगा किसी का सूरतो हाल, ज्यादा उम्मीद मत पालना अच्छा होगा नया साल, खेल वही जारी रहेगा, चालाक धर्म, जाति पाती और अछूत कहेगा, दुश्वारियों से जान नहीं छूटेगा, लुटेरा खुलकर लूटेगा, भाग्य मानने वालों का भाग फूटेगा, जहरीली हवाओं से दम घुटेगा, होगा वही लड़ाई व मारकाट, होगा हमेशा की तरह बंदरबाट, नेता विभिन्न मुद्दे उछालेंगे, सब लोग उधर ही दिमाग डालेंगे, विपक्ष अपना खेल संभालेंगे, प्रशासन सबका तेल निकालेंगे, हां पैसे वालों के लिए होगी कुछ दिन खुशियां, त्राहिमाम करते रहेंगे जो है दीन दुखिया, मन मस्तिष्क में वहीं सड़ांध होंगे, ऐसे ही लोग सभ्रांत होंगे, बस इस गुजरते जैसा न हो नया साल, जिसका स्वा...
कभी  तो थक जाया करो
कविता

कभी तो थक जाया करो

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** थक गई हो क्या, नहीं यू ही लेट गई हूँ, क्या चाय बना दूँ!! कभी थकती नहीं वो दिनरात जूझते-जूझते ! बच्चों की नींद की निगरानी करती बिना खटपट काम निबटाती ! स्कूल, ऑफिस से आने पर गर्म-गर्म भोजन, नास्ता परोसती क्या कभी थकती नहीं होगी? दिन में सबके आराम के पलों मे कपड़े तहाती, इस्त्री कर सब की अलमारियों में सजाती, अम्माँ क्या चाय मिलेगी कि पुकार पर, चौके में दौड़ जाती, कभी तो थकती होगी !! इतना आसान कहाँ होता है उसको खुद की मन की करना , सारे प्रलोभन छोड़ने पड़ते होंगे! इनको ना कहने की आदत नहीं होती इनके सपनों में भी दूध उबल कर गिरता होगा, इनकी आँखों की पलकें भी घर के दरवाजों पर बिना झपके लगी होती हैं कि शायद कोई मेहमान आता होगा ! सपने में भी इनको चैन नहीं मिलता है! हे नारी त...
इंतजार
कविता

इंतजार

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** इंतजार है ज़ब कोई अपनी खुशी से हमसे बात करें। इंतजार है ज़ब कोई समझें हम इतने बुरे भी नहीं है। इंतजार है ज़ब कोई समझें साथ खड़ा व्यक्ति मानव नहीं महामानव है। इंतजार है ज़ब कोई समझें हम उनको जीवन का हर मुकाम फतेह करते देखना चाहते हैं। इंतजार है ज़ब कोई समझें आध्यात्मिक लोग ऐसे ही किसी के जीवन में नहीं चले आते। इंतजार है ज़ब कोई समझें कि मैं आया हूँ उसके जीवन को एक दिशा देने। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा...
गणित दिवस
कविता

गणित दिवस

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** गणित दिवस पर जिंदगी भर का गणित लगाया। क्या खोया क्या पाया, इसका हिसाब लगाया। जब पाया में से खोया को घटाया हासिल का शुन्य आया। सोचा कर्म तो इतने करे, फिर भी जीरो क्यों आया। कर्मों में से अपनी जिंदगी की मेहनत का जोड़ लगाया १०० में से ९९ नंबरों को पाया। एक नंबर को ढूंढने में सभी कर्मों का लेखा जोखा पाया। आखिर में यही पाया जीवन एक जिम्मेदारी। जोड़ लगा कर जिंदगी जीरो ही पाओगे। कर्मों का फल ईश्वर के हाथों अंत में ही पाओगे। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरच...
अंतर्राष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस
संपादकीय

अंतर्राष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस

प्रो. डॉ. दीपमाला गुप्ता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** 💐💐आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं, नमस्कार🙏🏻🙏🏻😊 आज अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस हैं, यूं तो सभी दिवस एक विशेष आवरण लिए होते ही हैं, लेकिन दिवस को मानना एक बाध्यता और उदासीनता की और इशारा करता हैं, जो हमें अपनी हिंदी भाषा के प्रति जागरूक और सजग होने के लिए भी प्रेरित करता हैं, तो आइए आज हिंदी के बारे में बात करके हिंदी पर भी हम चार चांद लगाते हैं, ऐसा लगता हैं, हिंदी को हम भारतीयों को छोड़कर कोई भी दोयम दर्जे की नहीं मानता हैं , सिर्फ हमें विश्वास करने की आवश्यकता हैं कि हिंदी आज भी वैश्विक तौर पर जानी मानी भाषा मानी जाती हैं, और भारत में तो हिंदी को भी महिलाओं की तरह दोयम दर्जा ही प्राप्त हैं, बहुत कोशिशें होती हैं, हिंदी पखवाड़ा, हिंदी दिवस कार्यक्रम, सेमिनारों, संगोष्ठियों को रखक...
धरती
कविता

धरती

पूजा महाजन पठानकोट (पंजाब) ******************** धरती है हमारे लिए कितना कुछ कर जाती हम सबका है भार उठाती जीवन की राह को है आसान बनती पेड़ों, नदियों, पहाड़ों आदि से हमारा जीवन है महकाती जीवन की नई दिशा है दिखाती धरती की कीमत जानों ए मेरे साथी नहीं तो बन जाओगे तुम धरती के अपराधी स्वच्छता की खाओ तुम कसम धरती को हरा भरा रखने के लिए उठाओ तो सही तुम पहला कदम परिचय :- पूजा महाजन निवासी : पठानकोट (पंजाब) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, ह...
प्रीत की राह
कविता

प्रीत की राह

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कल तक जिनके साथ चले हर पल हम उनके साथ चले। खयालों मे वो जब भी आएँ संग मे यादों की बारात चले। कल तक… चलना ही है जीवन की रीती पथिक कितने ही आन मिले। पल दो पल का साथ निभाया सब रिश्ते नाते छोड़ कर चले। कल तक… बन्धन है ये प्यार का न्यारा मन का मीत बने जो दुलारा। अन्तर मन मे अंकित वो मूरत तन्हाई मे भी साथ साथ चले। कल तक... प्रीत की राह पर चले हम तो मन मन्दिर मे अब प्यार पले। देते रहेंगे हम उनको दुआएँ जब तक जीवन ज्योति जले। कल तक… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन रूचि रही है...
आँच अहसास की
कविता

आँच अहसास की

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** सुलग रहे मोरे अंग अंग सजना तड़पूं अकेली मनवा चैन न पाये बसंत बयार बहे, मौसम रंगीला तरसे जिया, काहे न पिया आये कूके कोयली, बोले पपीहा विरह-अगन मोरा जिया जराये विरह-अगन से जियरा धधके ननदिया जब शृंगार सजाये फूलवा महके, पाखी चहके देवरानी, जेठानी छेडछाड़ जाये मन ही मन मैं तरसूं घनी जो लहक लहक भाभी रंग उड़ाये देवर होले होले करे इशारे कैसे बचूँ, मोहे समझ न आये आय पिया मोहे उर से लगाओ रातें सर्दी की खाली न जाये चैन मिले जो दीदार करूँ मैं लंबी रतिया मोहे खूब सताये टेर उठे जो माधव मुरलिया की चीर, चीर जाये करजेवा मोरा झंकार उठे पग की पायलिया नयन तन्हा, छलक-छलक जाये सातों सुर हँस सजाये पवनिया इंद्रधनुष रंग नभ में सरसाये इंतज़ार में गौरी पूछे दरवजे से मनवा सरसे,कब पिया आये आँच अहसास ...
आओ मनाएं मकर सक्रांति
कविता

आओ मनाएं मकर सक्रांति

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** पौष जाए माघ आए शीत की छटा बह आये मकर सक्रांति पर खुशियाँ घर घर आये।। घरपरिवार में तिल गुड़ चिड़वा मुड़ी लाये मकरसक्रांति पर्व की खुशियाँ तनमनमे छाए।। मकर सक्रांति पर्व है ऐसा दान धर्म स्नान भाये वस्त्र अन्न बर्तन कम्बल का दानपुण्य बढ़ जाए।। तीर्थों में आनाजाना, मकर सक्रंति पर्व बताये भारतवर्ष के हर कोने में, मकरसक्रांति मनाए।। नदियां कुंड तालाब पोखरे में ठंडे जल से नहाए मकर सक्रांति पर्व की परंपरा की रीत निभाए।। दही चिड़वा घेवर खानपान में आनंद खूब लाये एक संग में शीत की लहर में अलाव को जलाए।। आसमान की रौनक चारो तरफ यह पर्व महकाये रंग बिरंगी लाखों पतंगों को उड़ाने की मस्ती लाये।। मकर सक्रांति माघ महीने का है दान धर्म का पर्व परंपरा को परम्परागत निभाये, सन्देश सब फैलाये।। आओ हम सभी प्रेमपूर्वक मकर सक...
श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है
कविता

श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** सबने उत्तम अवसर पाया। विगत अनेकों वर्षों से, राधे भैया ने झूम मनाया। श्रेष्ठ भक्त... राधे भैया ने निवास को, सत्संग से है तीर्थ बनाया। प्रेरक बनकर हम अनुजो के, सबको भक्ति मार्ग दिखाया। श्रेष्ठ भक्त ... उनका वरद हस्त है सिर पर, ये आशीष सदा फलता है। वे जो मार्ग बताते हमको, उसपर परमेश्वर से मिलाया। श्रेष्ठ भक्त... हनुमत से प्रार्थना यही है, उनको पूर्ण स्वस्थ वो करदे। सत्संग बिन व्याकुल आत्मा को, दे सत्संग तृप्त वो करदे। हनुमत सदा दास की सुनकर, तुमने उसका मान बढ़ाया। श्रेष्ठ भक्त का... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है...
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश
स्तुति

सदाशिव शंकर महेश्वर महेश

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय- जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र- अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्- निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी...
लेखकों की पिकनिक
व्यंग्य

लेखकों की पिकनिक

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** इस बार पुस्तक मेले में किताबों की नहीं, लेखकों की पिकनिक तय हुई। निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया प्रगतिशील, प्रगतिवादी, प्रतिक्रियावादी, विवादप्रिय, सर्ववादी और सर्वनाशवादी सभी लेखक संघों ने मिलकर ठाना कि जब साल भर साहित्य में एक-दूसरे को स्वाद चखाते ही रहते हैं, तो क्यों न एक दिन सचमुच स्वाद खुद भी चखा जाए। अध्यक्षता का भार स्वाभाविक रूप से परम श्रद्धेय परसादी लाल जी ‘जुगाड़ी’ को सौंपा गया जो एक साथ परजीवी, बहुजीवी, बुद्धिजीवी, आलोचक, समीक्षक और विमोचक हैं। पहले उन्होंने अपनी मरणासन्न व्यस्तता का हवाला देकर आने से इनकार किया, पर प्रथम श्रेणी यात्रा-भत्ते की अग्रिम राशि ने उनमें तुरंत साहित्यिक प्राण फूँक दिए। नियम तय हुआ हर लेखक घर से बना खाना लाएगा। खुद न बना सके तो किसी और का उठा लाए, ...
नव वर्ष हमारा तब होगा
कविता

नव वर्ष हमारा तब होगा

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** नव वर्ष हमारा तब होगा, खुशियों का आलम जब होगा। कलियाँ कलियाँ मुस्काएगी, कोयल भी गीत सुनाएगी। नव पुष्प खिलेंगे बागों में, वह शोभा मन को भाएगी।। मौसम अपना भी गजब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, ब्रह्मा ने सृष्टि का सृजन किया, विक्रमादित्य को राज्य मिला। विक्रमादित्य के नाम पर हीं, विक्रमी संवत् शुभ नाम मिला।। प्रकृति का रूप अजब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, प्रभु राम का राज्याभिषेक हुआ, जन जन का रक्षक नेक हुआ। चैत्र नवमी का पहला दिन, नव दुर्गा का भी प्रवेश हुआ।। वह घड़ी जानिए जब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, वन उपवन एक सदृश लगे, जब स्वयं मनोरम दृश्य लगे। हो स्नेह की बादल की वर्षा, कोई ना जब अनभिज्ञ लगे।। वह समय भी बहुत सुलभ होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, गुलाम किया जिसने हमको, उसका हम पर्व मनाए क्यों...
छेर-छेरा मांगे बर जाबोन
आंचलिक बोली, कविता

छेर-छेरा मांगे बर जाबोन

खुमान सिंह भाट रमतरा, बालोद, (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी - गीत) छेर-छेरा मांगे बर जाबोन छेरीक छेरा छेर बारकननीन लोकगीत गीत ल संग म गुन-गुनाबोन रे भाई... डफरा गुदुम संग मोहरी बजाके ताल से ताल मिलाबोन रे भाई... अऊ चल न संगी चलना साथी सुघ्घर संस्कृति परब के मान बढाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन... सोनहा धान म कोठी डोली सबो भरागे नवा बछर म पहिली तिहार हर आगे सुपा म धान भरके डोकरी दाई आंगना म आगोरत हावे पसर-पसर भर धान पाबोन रे भाई... सुघ्घर संस्कृति परब ल मनाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन.. पुस-पुन्नी अंजोरी पाख हर आगे मड़ई मेला धुमे बर टेटकू बैसाखू आगवागे मोर छत्तीसगढ़ महतारी के हवय छत्तीस चिन्हारी, सबला धीरे-धीरे बतलाबो रे भाई ... सुघ्घर संस्कृति परब ल मनाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन... परिचय :- खुमान सिंह भाट पिता : श्री पुनित राम भाट निवासी :...
अंतर्मन से परिचय
कविता

अंतर्मन से परिचय

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* मैंने स्वयं को शब्दों की भीड़ में नही मौन की गहराइयों में पहचाना है जहाँ हर प्रश्न उत्तर नहीं माँगता और हर उत्तर सच नहीं होता। समय ने मुझे तोड़ा नही बस परत-दर-परत खोल दिया- जो दिखा वो मेरा नहीं था और जो मेरा था उसे देखने की दृष्टि सबके पास नहीं होती। रिश्तों की भाषा अब सरल नहीं रही यहाँ सम्मान भी शर्तों पर मिलता है। जो समझ सका वही ठहरा बाक़ी सबने भीड़ को अपनाया और मुझे फालतू कह दिया। मैंने शिकायतों को शब्द नहीं बनाया क्योंकि मौन में भी मेरी अस्मिता बोलती है अब न सफ़ाई देने की आदत है न हर चोट का हिसाब रखने का धैर्य। जो चला गया वो ग़लत नहीं था बस मेरी गहराई के योग्य नहीं था और जो ठहर गया वो कोई वादा नही एक अनुभूति है। अब मैं स्वयं से भागता नही ना ही किसी को ...
कहाँ गई तुम दीदी
कविता

कहाँ गई तुम दीदी

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** घर के नींव की ईंट थी दीदी तुम सहसा पतझड़ी हवा ने बिखेर दिए हर ईट इस घर की, विरान कर गई वो आंगन जिसमें तुम्हारी मुस्कुराहटें खिलखिलाती थी!! हम एक वृक्ष से उत्पन्न पत्ते, नहीं जानते थे, कहाँ जाते है शाख से टूटकर धरा पर सूखे पत्ते सा कर गई जीवन हम सबका, नहीं समझ पाये तुम्हारा यूँ चले जाना आजतक !! जिंदगी के हर उतार-चढाव की साथी थी तुम, आज भी आंखों की नमी हो तुम, मेरी हंसी में कौन हॅसेगा साथ मेरे, दुःख में कैसे मुस्कराते हैं, सिखाती थीं तुम !! तुम्हारा चले जाना पिताजी सह ना सके , टूट कर बिखरे हम अब तक जुड़ ना सके थोड़ा तो ठहर जाती साथ हमारे माँ को कैसे ऐसे छोड़ गई तुम ?? आज भी हर एक के हृदय में बसी हो तुम, मुझे पता है मेरे आसपास ही हो तुम, बार बार दिल कहता है कहीं से लौट ...
अलविदा २०२५
कविता

अलविदा २०२५

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अलविदा कहे नफरत को, अलविदा कहे द्वेष को, अलविदा कहे आलस को, अलविदा कहे कटुता को, अलविदा कहे दुश्मनी को, अलविदा कहे राग को, अलविदा कहे कुविचारो को, अलविदा कहे मन के मेल को, अलविदा कहे अन्याय को, अलविदा कहे आतंक को, अलविदा कहे गरीबी को, अलविदा कहे विकारो को, अलविदा कहे दुष्टता को, अलविदा कहे अत्याचार को और अलविदा कहे 2025 को, अलविदा कहे शिकवा गिला को, सुबह उगते सुरज की किरणो के साथ नया सवेरा लायेगे 2026 की नयी कविता के साथ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मान...
हां रामसकाल आ गया है
कविता

हां रामसकाल आ गया है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जयंती समारोह के एक कार्यक्रम में कड़वे आसवित जल के सुरूर लेकर वो आ गया, सीधे आयोजकों से टकरा गया, बोला बैनर जो टंगा है उसमें मेरा क्यों चित्र नहीं है, कार्यकर्ताओं में मेरा कोई मित्र नहीं है, इसीलिए इस बैनर को यहां से हटाओ, मेरे फोटो वाला बैनर लगाओ, एक युवा कार्यकर्ता तमतमा गया, भयंकर गुस्से में आ गया, समता समानता के इस कार्यक्रम में कोई किसी पर दबाव नहीं बनाएगा, कोई अपनी राजनीति नहीं चमकाएगा, दूर दूर से भी और कुछ पास से अतिथि आये, कार्यक्रम के उद्देश्य और अपने विचार बताये, मगर रामसकाल कभी नजदीक बैठता तो कभी दूर, पूरे कार्यक्रम के दौरान कम नहीं हुआ उनका सुरूर, कभी कहता कि इन सब का खर्चा मैंने उठाया है, मेरे कारण आयोजन सफल हो पाया है, उस दिन एक मछली तालाब कैसे गंदा करता है, सकार...
जीवन एक संगीत है
कविता

जीवन एक संगीत है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जीवन एक संगीत है और यही मेरा मीत है और यह मेरी जिंदगी का गीत है। ******* जिस प्रकार संगीत के स्वर है सात। हमारी जिंदगी में सच होती है ये बात। ******** संगीत से हमें खुशी मिलती है जिंदगी की उदासी दूर रहती है। ******** हमारी सांसों में हमारी बातों में संगीत है। मधुर है ये जिंदगी का गीत है ******** संगीत हमारी जिंदगी में आनंद भर देता है। ग़म से खुशी की ओर ले चलता है। ******** जो संगीत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाता है। वो अपनी जीवन को खुशियों का द्वार बनाता है। ********* संगीत के स्वरों को अपनी जिंदगी में घोलिए। और अपने आप को आनंद की तराजू में तौलिए ******* अगर आपको जाना है ग़म की दुनियां से दूर तो अपनाईये संगीत को जरूर। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
मृग नयना तेरे
कविता

मृग नयना तेरे

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** न रात हुई आज पहली बार ना तारे ही निकले पहली बार मगर... अहसास किया दिल नें ये तारे महज तारे कहाँ झाँक रहे हैं हर तारे से चंचल मृग नयना तेरे..... ना पाखी उड़े नभ पहली बार ना फूलों पे भँवरे डोले पहली बार मगर... तेरे मदहोश इशारों ने जगाये अल्लहड़ अरमान कमसिन कजरारे ये बंकिम मृग नयना तेरे...... ना आज बसंत आया पहली बार ना कोयलिया कूकी पहली बार मगर..... सरगम सी उठी झंकृत हुई पायलिया बजाये सुरीले सुर सुलोचन मृग नयना तेरे..... ना घिरी घटायें आज पहली बार ना ही चली पवनवा पहली बार मगर.... चून्नर के लहराने संग लहराये मधुर मीठे सपने भीगे भीगे से यौवन सिंधु में मृदमयी मृग नयना तेरे..... ना झरने झरे आज पहली बार ना भीगी लंबी लटें पहली बार मगर.... भीगी स्याह जुल्फों से शबनम के कणों सी ल...
दिव्य दिवाकर
छंद

दिव्य दिवाकर

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** (मदिरा सवैया छंद) दिव्य दिवाकर मंद हुए, यह ठंड भयंकर रूप धरे। शीत हवा कुहरा बिखरा, अब पीत परे सब पात हरे। तुंग हिमालय श्वेत हुए, हिम सागर शीत बिहार झरे। शीत प्रभाव सु-प्रीति फले, मन यौवन अंग उमंग भरे। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, ...
एक साल की बैलेंस शीट
कविता

एक साल की बैलेंस शीट

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। द्वेष कलंकित दंश योजना धर्म पूछकर कत्ल करे। खुला खेल फर्रुखाबादी धर्म विरोधी जहर भरे। अनुभव सिंदूर बतला गया, बदला लेना झांकी है। ताकत देश की पहचान लो, असला मसला बाकी है। ड्रोन रॉकेट पिनाकी देख, शत्रु सांस अटकी देखो। राफेल व्याख्या सफल यात्रा, देखदेख कर भी भटको। एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। नेता मंत्री संत जनों से, बिगड़ी बोली स्वाद चखा। मांगी किसी ने कभी माफी, बोला कोई बोल यथा। ...