मुझे बनारस कर दो
श्वेता सक्सेना
मालवीय नगर (जयपुर)
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हे भगीरथी,
उतर आओ मन की मरूधरा पर
कल्याण कर दो
जन्मों की तृष्णा का उद्धार कर दो
हे देवांशी,
बहा दो संग स्मृतियों की भस्म
सब पावन कर दो
हे मोक्षदायिनी,
मेरी मुक्ति का साधन कर दो
हे गंगे,
मैं अधीर हूँ तुम्हें छूने को,,
मुझे बनारस कर दो
परिचय :- श्वेता सक्सेना
निवासी : मालवीय नगर जयपुर
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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