अक्षत रहो मीत
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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अखण्ड सौभाग्य व्रत तीज पर विशेष
साँसों की डोरी को ताने
मांगूं तेरी लंबी सांसे
खुद पर लूँ मैं तिरी बलाएँ
तुझ पर कोई आँच न आए
बनी मैं तो सावित्री जैसी
यमराजों की ऐसी तैसी
सुख साज त्याग चली सिय सी
जीवन क विष खींचूँ अमिय सी
ईश्वर से नित माँगूँ मीत
तुझ संग निबहें राग के रीत
प्रार्थना सदा यही करूँ मैं
तेरी अँखि आगे निबटूँ मैं
जब तक रहूँ जीवन में संग
कोई तुझे कर पाए न तंग
तेरे सारे दुख चुन लूँ मैं
खुशियाँ राहों में बुन दूँ मैं
अक्षत रहे तू जीवनसाथी
तू मेरे जीवन की बाती
परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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