तनहा
अमरीश कुमार उपाध्याय
रीवा म.प्र.
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अब तो हर सफ़र अकेले करना है,
ज़माने से अब किसे डरना है।
डर रहे थे जिसकी खातिर,
वो भी अब तनहा कहा रहता है।
वो समझे हम टूटेंगे,
मगर हौसला भी कम कहा रखता है।
चल दिया अपने से अलग,
अब रूबरू की कसक कहा रखता है।
हौसला साथ का सफ़र कहा रखता है,
वो भी तनहा अब कहा रहता है.......।
ज़माने से अब किसे डरना है.....।।
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परिचय :- अमरीश कुमार उपाध्याय
निवासी - रीवा म.प्र.
पिता - श्री सुरेन्द्र प्रसाद उपाध्याय
माता - श्रीमती चंद्रशीला उपाध्याय
शिक्षा - एम. ए. हिंदी साहित्य, डी. सी. ए. कम्प्यूटर, पी.एच. डी. अध्ययनरत
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