जब हमेशा के लिए सोता है जवान
रोशन कुमार झा
झोंझी, मधुबनी (बिहार)
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जब कोई जवान हमेशा के लिए सोता है,
दिल क्या? मेरा दिमाग़ भी रोता है।
क्योंकि कोई अपनी सिन्दूर
तो कोई अपने लाल को खोता है,
सच पूछो तो बड़ा दुख होता है,
जब कोई जवान हमेशा के लिए सोता है।
चाह कर भी नहीं देखते कि वह पतला है या मोटा है,
बल्कि आँसू के साथ मैं एक दर्दनाक कविता बोता है।।
क्योंकि मेरी कोई सीमा नहीं,
दर्दनाक कविता लिखते वक़्त मेरे
कलम के गति धीमा नहीं।
यूं तो हर कोई आँसू पोछता है,
पर हम यूं आँसू के साथ एक दर्दनाक
कविता के बारे में सोचता है।
जब कोई माँ अपनी पुत्र खोती,
पाल-पोष कर बड़ा किये रहती, खिलाकर रोटी।
जब कोई स्त्री अपनी सिन्दूर धोती,
हम यूं रोशन आँसू के साथ लिख बैठते कविता उन
शहीदों पर, इसे मत समझना पथरा-पोथी।।
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परिचय :- रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज, कोलकाता
निवासी : झोंझी, मधुबनी, बिहार,
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