दीपावली
वीणा वैष्णव
कांकरोली
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इस बार दीपावली, हम इस तरह मनाएंगे।
हर घर रोशन हो, सोच यही अपनाएंगे।।
पटाखे जला, पर्यावरण प्रदूषण नहीं फैलाएंगे।
उन पैसों से, गरीब बच्चों के उपहार लाएंगे ।।
मिट्टी दीपक जला, रोशनी चहुँओर फैलाएंगे।
चीनी उत्पादकों को हम, अब नहीं अपनाएंगे।।
अज्ञान अंधकार दूर कर, ज्ञान दीप जलाएंगे।
खुशहाल जीवन, जीने का हुनर सिखाएंगे ।।
मन मेल इस दीपावली, गंदगी संग दूर भगाएंगे।
सब के दिलों में बस, अपनत्व भाव जगाएंगे।।
गरीब चौखट पर, इस बार दीप जगमगाएंगे ।
भेदभाव भूलकर, मिलकर दीपावली मनाएंगे।।
बंदनवार हर द्वार लगा, रस्म कुछ यू निभाएंगे ।
रामवतार मान अतिथि, कुमकुम तिलक लगाएंगे।।
लक्ष्मी पूजन कर, माँ को प्रसन्न कर जाएंगे।
कोई भूखा ना रहे, बस यही आशीष पाएंगे।।
वसुधैव कुटुंबकम की, भावना हम अपनाएंगे ।
देश पर विपदा आए तो, प्राण बाजी लगाएंगे।
श्रीराम को आदर्श बना, जीवन...





















