मौन
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मौन वाचाल, मौन चपल
मौन मे बोलो मौन मे चलो
शून्य हो चलो, मौन मे गा ओ
मौन मे है मन का मन्थन
मौन मे अविरल, मौन मे स्वच्छद
मौन मे उठती मौन मे गिरती
जैसे सरिता च्न्चल।
मौन मे उढान भरो शक्ती से
अपने मौन विचारो के पंख फैलाकर
जैसे उडान भरने को उत्सुक पक्षी
बार, बार पंख फैलाकर मौन मे
उछलता अपने लक्ष्प की ओर।
नौन आकाश मौन धरती
सारी प्रकृति मौन फिर भी
फिर भी देती है, देती रहेगी
मानव को अवलम्बन।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरक...


















