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शहीद दिवस पर नमन
गीत

शहीद दिवस पर नमन

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** मुक्तक: असर खुशबू का जेहनों से उड़ाया जा नही सकता, शहीदों की शहादत को भुलाया जा नही सकता। वतन के वास्ते जो मर मिटे है, हक की राहों में, कभी उपकार को उनके भुलाया जा नही सकता। गीत: कोटि नमन माताओं को थे, जिनके तीनो लाल, कर गए कैसे-कैसे कमाल। हंसते-हंसते फांसी चढ़ गए, किया न तनिक मलाल, बन गए अंग्रेजो के काल। भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, जिनके थे प्रेरक अर्जन देव। मन में था, राष्ट्र प्रेम सदैव, जिनको था, प्यारा सत्य मेव। वंदे मातरम बोल वतन पे तीनो हुए निहाल..... कर गए कैसे-कैसे कमाल जिन्हे था चढ़ा बसंती रंग, स्वराज की पी गए ऐसी भंग। नशे में हो गए मस्त मलंग, ठानली अंग्रेजो से जंग। सांडर्स को बे मौत जा मारा, बदला लिया निकाल... कर गए कैसे-कैसे कमाल हुकूमत बरतानिया घबराई, सांडर्स की मौत से थी खि...
हवाओं का हेंगा चला
कविता

हवाओं का हेंगा चला

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** हवाओं का हेंगा चला चैत के मौसम में! फसलों को नींद आई चैत के मौसम में!! कुम्हलाए हुए मन को अब कौन जगाए? सोती हुई फसलों को- कैसे कर उठाए! खेती के भाग सोए बासन्ती-समागम में!! चला गया वात-चक्र पवन अब भी शीतल है! रह-रहके प्रात:-रात गिरता किया नभ-जल है! सोने जैसे गेहूँ का - रूप सना पंकम में! नीले-नीले मौसम में पहाड़ों की याद आई दिन-भर घिरे बादल में शिलांग जैसी छवि छाई पर कृषकों के नींद उड़ी मैदानी मौसम में! कुमायूँ की सड़कों पे बुल्ले उछल रहें चट्टानों से तेज-धार झरने निकल रहें हरा-स्वप्न डूब गया नदियों के झमझम में! हवाओं का हेंगा चला चैत के मौसम में! फसलों को नींद आई चैत के मौसम में!! परिचय :-  बृजेश आनन्द राय निवासी : जौनपुर (उत्तर प्रदेश) सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंद...
नारिया
कविता

नारिया

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सतयुग, द्वापर, त्रेता या कलियुग नारी सदैव डटी रही अपनै धैर्य पर अहिल्या, अनुसुइया, अरुन्धती ने अपने तप से इतिहास रचा कौशल्या, कुन्ती, सीता सह्कारिक पुत्र संग महाभारत, रामायण रचा। लक्ष्मी, पार्वती, सीता चन्डी बन रण मे उतरी मीरा, मुक्ता बनी भक्ति की पराकाष्ठा सन्त सखु, गौरा ने गाई जीवन की कटु सत्य गाथा। दुर्गा, झांसी की रानी की तलवारे कहती आज उनकी कहानी पद्मिनी का जौहर क्यो भूलें मां होकर भी कठोर बनी जीजाबाई, पन्ना धाई अहिल्याबाई। और आज की नारी भी कहती है मै अबला नही सबला हूँ उची उड़ान भर हिमालय, अन्तरिक्ष मे पंहुच गई पंहुच गई समर रण मे शान्ति दूत बनी देश, विदेशों में रहकर भारत का तिरंगा लहराती। मां सरस्वती का वरदान इनको चित्रांकन, लेखन पर लेखनी चलती। दया, दान, उदारता, समर्पण का संकल्प लेकर ...
एक वक्त के बाद
कविता

एक वक्त के बाद

शशि चन्दन "निर्झर" इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** किस्से-कहानी बदल जातें हैं एक वक्त के बाद। नन्हें-नन्हें पौधे वृक्ष हो जातें हैं एक वक्त के बाद। तमाम अरमान गुजरते तो हैं आंखों की गलियों से.. फिर मोती से कौरों पे ठहर जाते हैं, एक वक्त के बाद।। सुनो नया-नया सा एहसास पाकर, गैर भी क़रीब आ जाते, तासीर मुताबिक़ अपने पराए हो जाते हैं एक वक्त के बाद।। रहमत खुदा की, अमानत अपने वतन की सहेजे तो सही... पर जानें कैसे अहम के डंके बजने लगते, एक वक्त के बाद।। पंक में खिलते पंकजराज, रंग बिरंगे हाथों में जचती हिना लाल, कि राजा रंक फकीर सबकी, होती एक ही गति, एक वक्त बाद।। सुन "शशि" धरती अम्बर नाप ले जितना नाप सके, कि ये माटी की काया माटी हो जाती एक वक्त के बाद।। परिचय :- इंदौर (मध्य प्रदेश) की निवासी अपने शब्दों की निर्झर बरखा करने वाली शशि ...
नन्ही गुड़ियां
बाल कविताएं

नन्ही गुड़ियां

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** (बाल कविता) नन्ही नन्ही गुड़ियां आई चाँद सितारे साथ है लाई। दो चोटियां बनाकर आई देखकर उसको सबके चेहरा पर मुस्कुराहट आई। लाल-लाल गालों से मुस्कुराती दूध जैसे दांत सबको दिखाती नन्हें नन्हें हाथों से क ख ग लिख कर आई, लिखवाट उसकी सबको पसंद आई। गोल गोल गालों को मटकाती खुद को परियों की रानी कहलाती। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय ह...
अमृत बरसाओ त्रिभुवन
स्तुति

अमृत बरसाओ त्रिभुवन

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बीत गई है अब सहर आ गया अंतिम प्रहर मचा है चहुँ ओर कहर नीलकंठ पधारो अब करो पान प्रभु ये ज़हर आतंक की फैली लहर धरा भी गई अब दहल ये पसर रहा है खलल अखिलेश्वर पधारो अब शांति की करो पहल बुद्धिप्रदाता तेरे गणपति रिद्धि सिद्धि हो प्राप्ति शुभ लाभ वैभव सम्पति देवाधिदेव पधारो अब हर क्षेत्र में हो क्षतिपूर्ति सरहदों पे मच रहा शोर दुश्मनों का बढ़ रहा जोर टूट गई रिश्तों की डोर हे परमेश्वर पधारो अब लाओ इक नई भोर पर्वतों के ध्वस्त आवरण नदी ताल झेले प्रदूषण त्रस्त हरीतिमा पर्यावरण शिव शंम्भू पधारो अब अमृत बरसाओ त्रिभुवन परिचय : सरला मेहता निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी ...
मृत्यु शय्या
कविता

मृत्यु शय्या

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जन्म और मृत्यु शाश्वत सत्य है। नहीं कोई इसका विकल्प है। ******* एक दिन सभी को मृत्यु शय्या पर सोना है। चाहे आप हो या डॉक्टर सभी का यह हाल होना है। ******** जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निशचित होगी। किसी की आज तो किसकी कल होगी। ******* मृत्यु से आज तक कोई जीत नहीं पाया है। जिसने भी लिया है जन्म अवश्य मृत्यु को पाया है। ******* मृत्यु शय्या पर पहुंचने से पहिले जिंदगी जीना सीख लीजिए। कुछ अच्छे कर्म करें कभी किसी को कष्ट न दीजिए। ****** जब आपने अच्छे कर्म किये होंगे तभी यह बात होवेगी। जन्म लेने पर आप रोये थे। मृत्यु होने पर दुनियां आपके लिये रोयेगी। ******* मृत्यु शय्या हमारी अंतिम शय्या है। जिस से हम उठ नहीं पाते है। मिट्टी से जन्म लिया है और मिट्टी में ही मिल जाते है।...
हो जाओ तैयार साथियों
कविता

हो जाओ तैयार साथियों

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** हो जाओ तैयार साथियों अब परीक्षा की बारी है लक्ष्य भेद कर दिखलाओ कौन किस पर भारी है !! मुश्किलों से लड़कर तुम्हें लक्ष्य मार्ग पर बढ़ना है छोड़ आलस का दामन रगो में साहस भरना है !! कर्म से किस्मत लिखने की अब तुम्हारी बारी है हो जाओ तैयार साथियों अब परीक्षा की बारी है !! सफलता नहीं मिल जो किस्मत पर भरोसा करते है मंजिल उन्हें मिलती जो दिन-रात मेहनत करते है !! मेहनत करने वालों पर ही सफलता बलिहारी है हो जाओ तैयार साथियों अब परीक्षा की बारी है !! परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष...
बिकती सच्चाई
गीत

बिकती सच्चाई

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कलियुग में बिकती सच्चाई, झूठ कपट भी भारी है। तृष्णा के गहरे सागर में, जाने की तैयारी है।। खेले खेल सियासत भी अब, कालेधन की है माया। खींचें टाँग एक दूजे की, सत्ता लोलुप है काया।। बस विपक्ष की पोल खोलना, नई नीति सरकारी है। दौड़ सीट हथियाने की है, देते पद की सौगातें। भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा भी, राम राज्य की हैं बातें। रंग बदलते गिरगिट जैसा, नेता खद्दरधारी है। गागर रीती है खुशियों की, भीगी अँखियाँ रमिया की। तोता मैना करते क्रंदन, रहती चिंता बगिया की।। करें देश को नित्य खोखला, जनता भी दुखियारी है। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट...
विष्णु, शंकर सनातन में
स्तुति

विष्णु, शंकर सनातन में

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** ऋग्वेद के अथर्वशीर्ष ने, पद्म पुराण, वाल्मीकि रामायण में आदित्यहृदयस्तोत्र ने सूर्य को विष्णु माना विष्णु का अर्थ ‘सर्वव्यापी‘ सूर्य है सर्वव्यापी ऊर्जा संपूर्ण ब्रह्मांड की रवि रश्मि है दात्री उससे प्रस्फुटित होती प्रकृति प्राणवायु की दाता प्रकृति। प्रकृति के मूल में सूर्य रूप में विष्णु विराजे कण-कण पर रवि की माया सहस्त्रनाम विष्णु ने पाया स्वयंभू विष्णु देते सबको आकार लेते स्वयं मनुज रूप में अवतार करने पृथ्वी और सज्जन का उद्धार।। शंकर शमन के कारक मूल स्थान उनका पर्वत, हिम का अंचल है सुखदायक जल का स्रोत, वहीं से गंगा शीतलता औ शांतिप्रदायक हिमगिरि कोशंकर माना गिरि और जल है कल्याणक इसीलिये शंकर को शिव माना सूर्य देव को विष्णु जाना।। एक‌ परमशक्ति का यही वितान ताप व शीतलता के‌ घट विष्णु और शंकर...
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
कविता

मैं तुमसे प्यार करता हूँ

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** तुम्हारे दिल में रहता हूँ। जानेमन तुम पे मरता हूँ।। सनम तुम जान हो मेरी, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।। तेरे बिन रह नहीं सकता। जुदाई सह नहीं सकता।। तुम हर पल साथ हो मेरे, मैं तुझे भूल नहीं सकता।। ये दुनिया मधुबन लगती है। जीवन आनंदमय लगता है।। तुम बहार हो बगिया की, चहुँओर मनभावन लगता है।। खुशी और प्रेरणा हो तुम। सुख और चेतना हो तुम।। मुझे सफलता दिलाती हो, मेरी जीवन संगिनी हो तुम।। परिचय : अशोक कुमार यादव निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम इकाई। प्रकाशित पुस्तक : युगानुयुग सम्मान : मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 'शिक्षादूत' पुरस्कार से सम्मानित, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, छत्तीसगढ़ हिन्दी रत्न सम्मान, अटल स्मृति सम्मान, बेस्ट टीचर अवॉर्ड। घोषणा पत्र : मैं यह प...
खुशबू बन बिखरना है
कविता

खुशबू बन बिखरना है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** मर जाने के डर से नहीं मरना चाहते हो, तो आज ही मर जाओ, बड़ी जिंदगी चाहते हो तो अभी सुधर जाओ, सुधर कर भी गर मुर्दे ही रह गए, बिना प्रतिरोध सैलाब के धारे में बह मर गए, तो बता जी रहे थे वो कौन सी जिंदगी थी, न प्रतिकार न प्रतिशोध बकवास जीवन अब तक क्यों और किसके लिए सह गए, खंजर को हमारी जरूरत कभी नहीं होती, अगर लगाव होता तो वार करता ही क्यों? हल्के वार से भी शरीर नहीं रह पाता ज्यों का त्यों, मैं सुधर चुका हूं, अपनी जागृति वाली खुशबू संग कोने कोने में बिखर चुका हूं, कभी न कभी लोग साथ आएंगे, महक खोजते खोजते जब अपना भूत खोजेंगे तो निश्चित ही खुद खुशबू बिखरायेंगे, जिन्हें औरों की ड्योढ़ी पर निश दिन नाक रगड़नी है रगड़े, ऐसों को छोड़ो उनके हाल पर हर हाल में आगे बढ़ना है उनका जाल काटते बिना क...
समाज का दर्पण है डॉ. मुकेश “असीमित” की पुस्तक: गिरने में क्या हर्ज है
पुस्तक समीक्षा

समाज का दर्पण है डॉ. मुकेश “असीमित” की पुस्तक: गिरने में क्या हर्ज है

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** व्यंग्य संग्रह - गिरने में क्या हर्ज़ है। व्यंग्यकार - डॉ. मुकेश गर्ग "असीमित" प्रकाशक - भावना प्रकाशन, दिल्ली। मूल्य - ३०० रु. (पेपरबैक) समीक्षक - डॉ. गणेश तारे (शिक्षाविद, साहित्यकार, संस्थापक अल्बर्ट आइन्स्टाइन एजुकेशन ग्रुप कोटा) डॉ. मुकेश गर्ग "असीमित" की पुस्तक "गिरने में क्या हर्ज है" एक रोचक कृति है जो हिन्दी साहित्य में व्यंग्य लेखन, पठन, पाठन में रूचि रखने वाले साहित्य प्रेमियों का ध्यान बरबस खींचने में सक्षम है। पहले बात शीर्षक की। शीर्षक अपने आप में एक तीव्र आकर्षण लिए है। जब मुझे यह पुस्तक प्राप्त हुई तो आमुख पढ़ने के बाद सबसे पहले मैंने पुस्तक के शीर्षक वाला व्यंग्य पढ़ने का विचार किया। व्यंग्य पढ़ने के पहले मैंने सोचा कि डॉ. मुकेश ने इसमें क्या लिखा होगा? तो मैं मेरा...
हम सभी हैं मौज़ में
कविता

हम सभी हैं मौज़ में

डॉ. रमेशचंद्र मालवीय इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आज हम सभी हैं मौज़ में क्योंकर जाएं हम फ़ौज़ में। सबको अपने-अपने सुख की चाह है सबकी अपनी मंज़िल, अपनी राह है देश पर मर मिटने वाले तो कोई और थे आज किसको अपने देश की परवाह है इंसान स्वयं अपनी खोज़ में आज हम सभी हैं मौज़ में। इस समय जो उठ रही है दूर आंधी न किसी ने रोकने की है पाल बांधी सभी अपने आपको समझ बैठे खुद़ा अब न कोई आएगा फिर से वो गांधी मानवता रो रही है रोज में आज हम सभी हैं मौज़ में। किस-किस से मांगने जाएंगे न्याय छल, कपट, धोखा, फरेब़, अन्याय न सुनी जाती पुकार किसी की यहां है ग़रीब़ी, मुफ़लिसी न कोई उपाय ईमान जा गिरा है हौज़ में आज हम सभी हैं मौज़ में। परिचय :- डॉ. रमेशचंद्र मालवीय निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। ...
द्रौपदी
कविता

द्रौपदी

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** पांच पति की द्रौपदी, छली गई वह नार, पासे पर फेंकी गई वह अबला हर बार, क्या पासा क्या दावा है स्त्री? उसका कोई अस्तित्व नहीं, जिस और उसे हांके कोई, गाय भैंस वह ढोर नहीं। एक संबंध के कारण झुकती है, आज अबला नहीं सबला नारी, कभी मायके कभी ससुराल में देखो, पासा बन बैठी है नारी। अपना व्यक्तित्व अपना है अहम, छल-कपट के कारण छली नारी, मन ही मन में वह विचार करें, क्या मेरा अस्तित्व नहीं कोई? क्यों दाव पर उसे लगाते हो, क्यों पासा उसे बनाते हो, अपनी इज्जत आबरू के कारण, तुम दुखी उसे कर जाते हो। एक आंख में आंसू उसके, एक आंख है नम है रही, औरों की राजनीति के कारण, अपनी इज्जत दाँव पर की। तुम समझो उसकी भावना को, नहीं किसी के पक्ष में वो, सबका साथ सबका है प्यार, बस यही उसी की झोली में है। मान अपमान सब सहन करें...
खुद बुलंद कर हौसला
मुक्तक

खुद बुलंद कर हौसला

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** दुरियो को दूर कर दिल से मिटाले फासला, न घबरा गम की आंधियों से खुद बुलंद कर हौसला। दौर तो आते रहेंगे और टल भी जायेंगे, शोर तो होते रहेंगे जलजले जल जाएंगे। आज हिम्मत से तु अपनी फिर बनाले घोंसला...... चह चहा हट जो हुई है फिर से वो आजाएगी, चमन में पतझड़ भी होगा, फिर बहार आएगी। माली को मत दोष दे तू खुद ही करले फैसला........ वक्रता पहले भी समय की ऐसी ही देखी गई, मिटती इंसानों की बस्ती आबाद फिर से हो गई। घाव भर जाते समय से, गर हो मन में हौसला........ ये समय भी आया हे तो कुछ तो देकर जाएगा, दानवता को मानवता का पाठ भी पढ़ाएगा। सकारात्मक सोच रख तु मन में अपने जोशला........ धैर्य, धर्म को त्याग कर, धारणी रहा खंगाल, पाकर वेदों की पूंजी भी अब तक रहा कंगाल। समय तुम्हारे हाथ हे मानव, अब भी करले फैसला...... न घबरा ...
जीवनद्वंद
कविता

जीवनद्वंद

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जीवन पल... पल, जीवन...क्षण-क्षण जीवन मे जीवन की हलचल जब किलकारी गूजे आगन मे सुख पाया मा के आचल ने। काजल का टीका लगाकर मुस्कूराता जीवन पल भर मे बाबा को सम्मोहित करता पग मे पैंजनियां पहने ढगमग, डगमग चलता जीवन। तुतलाती भाषा मे बोले केवल समझे, जाने मा का जीवन सरस्वती के अंक मे बैठ संस्कार, संस्कृति का पाठ पढता जीवन। नई राह, नया उद्देश्य, दृढता जीवन की भरता उडान सोपानो पर जीवन की पग-पग सीढी पल-पल संधान यह कहानी जीवन की। उदेश्यो मे सफल हुआ जीवन सात बन्धनो मे बन्ध गया कर्तव्य मे ऐसा, जकडा जीवन उसे लगा सब कुछ आनन्द एक क्षण गौरय्या सा उडता जीवन। और फिर और सोपानों पर चढते-चढते निढाल हो गया जीवन कुछ अंतराल मे लाठी पर आया जीवन दृष्टि, गति, कर्ण साथ छोडते जीवन का और ... और एक दिन अन्तिम यात्र पर जीव...
हिंदी का गुणगान
कविता

हिंदी का गुणगान

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** हिंदी का मैं गान करता हूँ हिंदी का मैं सम्मान करता हूँ। कभी मीरा को सुनता हूँ कभी कबीर को सुनाता हूँ। कभी जायसी के रहस्य में खो जाता हूँ कभी केशव के काव्य प्रेत से टकराता हूँ। कभी नानक की गुरुबानी बोलता हूँ कभी चंदबरदाई की वीरगाथा गाता हूँ। कभी तुलसीदास की तरह राम नाम का गुणगान करता हूँ। कभी सूरदास की तरह कृष्ण की हठकेलिया सुनाता हूँ। कवि हूँ हर हाव में, हर भाव में हिंदी का गुणगान करता हूँ। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख,...
मनाये रामनवमी
कविता

मनाये रामनवमी

गगन खरे क्षितिज कोदरिया मंहू (मध्य प्रदेश) ******************** सनातन धर्म के लिए एक हो जाओ हिन्दू। जन मानस भारतीय संस्कृति सभ्यता लिए जागो। एकता में होता दम, जातिगत समीकरण को, समाप्त करें। भेद-भाव मिटाकर हिन्दू जनहितैषी सकारात्मक ऊर्जा लिए हुए। जन जागरण हो, तो नैतिक पतन न हो हमारा, राम की महीमा ईष्ट जो सभी के राम सनातन धर्म की रामनवमी आ रही है हमारी संस्कृति सभ्यता का प्रतीक रामनवमी आ रही हैं। भारत में हिन्दूत्व ही पहचान हमारी। हिन्दू विश्व में अपनों के लिए प्यार मोहब्बत के लिए जाना जाता हैं गगन हमारी अंखणता परमात्मा जो जन-जन के दिलों बसते श्रीराम जीन की आ रही हैं रामनवमी रामनवमी भारतीयता में बहती श्रीराम की रामनवमी। महापुरुष ने फरमाया, शिक्षा की रोशनी समाज को मिले, संविधान धर्म निरपेक्षता लिए। क्यों न जातिवाद को भूला कर भाईचारा बढाये। भारतीय...
जय शिवाजी
कविता

जय शिवाजी

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** शाहजी भोंसले बाबा थे माँ थी महान जीजाबाई पुणे के शिवनेरी दुर्ग में अवतारे लाल शिवाजी थे माँ ने दी थी शिक्षा दीक्षा शस्त्र शास्त्र का ज्ञान मिला बुद्धिमानी निडरता पाई बहादुरी का थे दम भरते रामायण महाभारत पढ़ते सर्वधर्म समभाव वे रखते जातिभेद से नफ़रत करते सबको अपना ही समझते कद छोटा और छोटा घोड़ा पर भारत का नक्शा बदला छुरी कटार जैसे हथियार कपड़ो में छुपाकरके रखते गुफ़ा और कंदराओं से छापामारी खूब करते थे मुट्ठीभर सैनिक लिए वे पहाड़ी चूहों से दुबकते थे आदिल शाह ने चालाकी से शाह जी को किया नज़रबंद फ़िर भी आदिल तोड़ न पाया वीर शिवा का चक्रव्यूह बड़ी साहिबा बीजापुर ने अफ़ज़ल खान को भेजा था उसने जो गड्डा खोदा था वो ख़ुद ही जमीदोज हुआ शाइस्ता खान बराती बनकर औरंगजेब का संदेसा लाया तीन उंगलियाँ कटवा करके जान ब...
कौआ बदले चाल
गीत

कौआ बदले चाल

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** ख़ूब जानता रमिया कैसे कौआ बदले चाल। अपने दल को छलते नेता, दल बदलू हो आज। फ़िक्र नहीं है कुछ जनता की, साधें अपना काज।। रंग बदलते हैं गिरगिट-सा, भरें तिजोरी माल। चलें थाम सत्ता का दामन, पैसों के हैं मीत। येन-केन हासिल हो ताकत, जाना है बस जीत चतुर शिकारी, उन्हें पता है, कहाँ छुपाना जाल। खोल पोल दूजों को लेते मोल दिखाकर माल।। गेंडे जैसी मोटी चिकनी, है इन सबकी खाल। बिना आग के इन्हें पता है, कैसे गलती दाल। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभाग...
मुझे भी बिकना है
व्यंग्य

मुझे भी बिकना है

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** आईपीएल मैच का सीजन चल रहा था। क्रिकेट के बारे में मेरा ज्ञान शुरू से ही सिर्फ फील्ड के बाहर गई गेंद को दौड़-दौड़ कर लाकर बॉलर को पकड़ाने तक सीमित है। कभी-कभी मेरे साथी किसी पड़ोस वाली आंटी के मकान का शीशा तोड़ने पर मेरा झूठा नाम लगा देते थे। इसी बहाने यह झूठी तसल्ली मिल जाती थी कि चलो, पड़ोस की आंटी और अंकल ही सही, कोई तो मानता है कि गेंद हम भी मार सकते हैं, शीशा हम भी तोड़ सकते हैं। क्रिकेट का बाजारीकरण भी देखा है। क्रिकेट अब गलियों से निकलकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों की जेब में आ गया है और सेलिब्रिटी के तीसरे पेज पर अपनी जगह बना चुका है। आईपीएल शुरू होते ही मीडिया हाउस की चांदी हो जाती है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापन, आईपीएल की बिडिंग से ही शुरू हो जाते हैं। हर तरफ गहमागहमी का माहौल ...
रणनीति
कविता

रणनीति

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** चुनाव में खड़े थे प्रत्याशी चार, जीतना है सबको नहीं चाहिए हार, चूंकि प्रतिद्वंद्वी थे तो मिलकर नहीं किये विचार, करना था एक दूजे पर प्रहार, पहले ने समर्थक वोटरों को गिना, कम पड़ रहे थे समर्थक तो कैसे जाएगा जीत छीना, योजना के तहत जाल बिछाया गया, फ्रेम में पांचवा प्रत्याशी लाया गया, जिसने द्वितीय उम्मीदवार के समर्थकों में अच्छा खासा पैसा बांट डाला, उनकी हिम्मत को काट डाला, दूसरे को पता नहीं कि रणनीति के तहत फोड़ा गया है बम, उसके सारे मतदाता खा पी नाच रहे झमाझम, पहले का अपना वोटर बच गया, दूसरे का वोटर पांचवे द्वारा कट गया, रणनीतियां ही करती है काम ईमानदार हो चाहे मूर्ख, हमेशा सफल रहते हैं चालबाज धूर्त। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़) घोषणा प...
होली
कविता

होली

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** संस्कृति की धरोहर है होली, संस्कारों की विरासत होली, प्रकृति का शृंगार है होली, जीवन का उपहार है होली, हम सबका गर्व है होली!! हर जीवन में रंग है भरती, चेहरों पर मुस्कान सजाती, स्नेह सौहार्द की धारा है होली रंगों की बौछार है होली !! शीत ऋतु की हो रही विदाई ग्रीष्म ऋतु की आहट आई, ज़न-जीवन मे उल्लास है भरती भूले बिसरों की याद है होली! प्रकृति की अनमोल धरोहर, हर रंग के जीव जानवर, इनपर भी हम प्यार लुटाए, प्रेम रंग से इन्हें सजाएं, मिलजुल कर त्यौहार मनाएं, आई होली आई होली!! परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार) निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश) सम्मान : राष्ट...
जिंदगी जीने की कला
कविता

जिंदगी जीने की कला

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** ईश्वर से सबको जिंदगी मिली है। किसी को कम किसीको ज्यादा मिली है। ******** जिंदगी सबके पास है पर सबको जीना नहीं आता। हर व्यक्ति खोने और पाने की चिंता में है जिंदगी गुजरता । ******* कुछ लोग जिंदगी गुजारते है। कुछ लोग जिंदगी काटते हैं। ******* जिंदगी मिली है तो जिंदगी का मजा लीजिये। जिंदगी जीने की कला सीख लीजिए। ******* सुख और दुख तो जिंदगी का हिस्सा है। यह सभी की जिंदगी का किस्सा है। ******* खुद भी खुश रहें दूसरों की भी खुशी का रखें ध्यान। तभी आप बन पायेंगे सबसे अलग इंसान। ******* सभी से प्यार और मोहब्बत करें। अपनी जिंदगी को खुशियों से भरे। ******* जिसको आ गयी जिंदगी जीने की कला। वही कर सकता है स्वयं और दूसरों का भला। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२...