नदियों की परिभाषा
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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नदियों का
अमृत घुला नीर
कर देता मन को अमर
नदियों की परिभाषा
आती है समझ
डुबकी लगाने
आचमन करने से।
देव, साधु संतों
श्रद्धालुओं से बन जाती
नदी स्वर्ग
हो जाते शीश नतमस्तक
और दुर्लभ दर्शन
हो जाते सरल
नदियाँ पूजनीय
जिसमें स्नान से हो जाते
लोग अमर।
परिचय : संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता : श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि : २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा : आय टी आय
निवासी : मनावर, धार (मध्य प्रदेश)
व्यवसाय : ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन : देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता
सम्मान : हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मा...























