एक भारत ऐसा भी
डॉ. जयलक्ष्मी विनायक
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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एक पुल के ऊपर
ठाठ बाट संभ्रान्त,
दूसरा पुल के नीचे
अर्द्ध नग्न सहता संताप।
एक लंबी छुट्टी का लेता
आरामदायक मजा,
दूसरा लंबी छुट्टी की लेता
कष्टदायक सजा।
एक सुरक्षित, आनंदमय,
गुनगुनाता, खिलखिलाता परिवार,
दूसरा चिलचिलाती धूप में
थका-मांदा पैर रगड़ता
सुबकता परिवार।
एक जो रोज नए
खाद्य पदार्थ की विधि से
अपनी चंचल जिव्हा को तुष्ट करता,
सोशल मीडिया पर इतराकर
अपनी पाक कला दर्शाता।
तो दूसरा एक कटोरी
भात के लिए दूसरों के समक्ष
हाथ पसारता।
आठ बच्चों में एक रोटी के
टुकड़े कर गटागट
पानी पी सो जाता।
एक बैंक में जमे पैसों का
लेखा-जोखा देख निश्चिंत।
दूसरा हाथों की उंगलियों को
चटकाता बिना आजीविका चिंतित।
एक बालकनी में आनंद लेता
पक्षियों की चहचहाहट।
दूसरे के मन में आर्तनाद
और घबराहट।
एक कोरोना के आंकड़े गिनता
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