जहाज का पंछी
सीताराम पवार
धवली, बड़वानी (मध्य प्रदेश)
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मैं इस जहाज का पंछी हूं
मेरा दूजा कोई ठौर नही
धरती पर जो सुकून मिलता है
वो कहीं और नहीं।
भूख नामुराद जहाज पर लाई है
मेरा तो ठिकाना और था
जो गुजर गया वो गुजर गया
फिर आएगा ऐसा दौर नहीं।
परिवार कहां और मैं कहां
उस परिवार के लिए तड़पता हूं
सहा नहीं जाता मुझसे अब तो
जालिम लहरों का शोर नहीं
जो इस जहाज पर मिल जाता है
उससे भूख मिटाता हूं
आंखों के आगे अंधेरा है दिखाई दे
ऐसी कोई भोर नहीं।
उम्मीद लगाए रहता हूं मै कब
धरती का साहिल मिल जाए
बीत गई सो बीत गई अब
करता उसपर मैं गौर नहीं।
नसीब में जो लिखा है वह
तो मिलना ही निश्चित है
अपनी किस्मत के आगे
चलता किसी का जोर नहीं।
पेट की भूख ने आदमी को
क्या से क्या बना डाला
इस भूख का दुनिया में कहीं
कोई और न छोर नहीं।
परिचय :- सीताराम पवार
निवासी : धवल...





















