हिंदी से लगाव
ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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मैं रोज हिंदी में बोलता हूँ
रोज हिंदी के नए
शब्द ही लिखता हूँ
रोज में हिंदी ही
रुचि से पढ़ता हूँ
अनुवाद सिर्फ
हिंदी में करता हूँ
गद्य पद्य हिंदी
में रोज लिखता हूँ
हिंदी भाषा का ज्ञान
लिखने पढ़ने में रोज
व्यवहारित करता हूँ
लेखकों कवियों
रचनाकारो की
रोज नवीन पुरानी
अनमोल पुस्तकें
सुबह से शाम फुर्सत में
रोज संग्रह करता हूँ
फुर्सत में रुचिकर
रचित ज्ञान
अन्तर्मन से पढ़ लेता हूँ
रोज नए नए रोचक
ज्ञान की खुराक
पढ़कर लिखकर
अनमोल ज्ञान
से तृप्त हो लेता हूँ
हिंदी की पुस्तकों का भरपूर
खजाना उनका
एक-एक पन्ना
मन मस्तिष्क में भर लेता हूँ
हिंदी की पुस्तकों से रोज
असीमित ज्ञान के भंडार को
रोज प्रेम से भर लेता हूँ
यही है पूंजी सँजोकर
रोज सुरक्षित रखता हूँ
हिंदी की गहराई में
खुशियों को ही नहीं
सबके बीच हिंदी ज...





















