खुद से एक मुलाकात करो
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
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सफर तो बस ऐसे ही चलते रहता है
हवाओं का रुख भी बदलते रहता है
कभी अपनों की अपनों से बात करो
कभी खुद से भी एक मुलाकात करो
खुद को भूले है केवल जगत के लिए
जी रहे हैं केवल अब अपनों के लिए
कभी खुद की भी बयाने हालत करो
कभी खुद से भी एक मुलाकात करो
वक्त कट न जाए केवल लाचारी में
जैसे कट ही रहा है दुनियादारी में
कभी खुद की बयाने जज्बात करो
कभी खुद से भी एक मुलाकात करो
ख्वाब तोड़े हैं हमने स्वयं के कितने
जुल्म सहे है जहां के हमने कितने
टूटे ख्वाबों की भी तो ख्यालात करो
कभी खुद से भी एक मुलाकात करो
आज मे ही जीवन को खुशहाल करो
भविष्य खातिर,आज ना बदहाल करो
बदलते वक्त से वक्त की भी बात करो
कभी खुद से भी एक मुलाकात करो
परिचय :- प्रमेशदीप मानिकपुरी
पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी
जन्म : २५/११/१९७८
निवासी : आमाचा...




















