चाहतों का नशा
रुचिता नीमा
इंदौर म.प्र.
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बहुत से नशे है इस दुनिया में,
किसी को दौलत का,
तो किसी को शोहरत का नशा है।
किसी को मंदिर का,
तो किसी को मदिरा का नशा है।
किसी को प्रेम का,
तो किसी को सफलता का नशा है।
हर किसी को किसी न किसी बात का नशा है,
लेकिन सच मे तो यह चाहतों का नशा है।
कि हर किसी को कुछ न कुछ पाना है,
लेकिन मिलने की बाद भी शांति नही मिलती है,
हर ख्वाईश जब पूरी हो जाती है,
तो अधूरी सी लगती है।
और फिर नई ख्वाईश जाग उठती है,
फिर भागने लगते है हम उस मृगमरीचिका के पीछे
उस अनजान को पाने के नशे में,
जो भागकर कभी भी न मिल पायेगा।
हर बार मिला भी सबकुछ,
लेकिन ये वो न निकला की
जिसके बाद कुछ पाने की ख्वाईश न बची हो।
ये नशा ही ऐसा है, जो चढ़ गया तो उतरता ही नहीं,
और हम भागते ही चले गए,
कभी इधर तो कभी उधर।
अब जब थक कर, रुककर देखती हूं
तो लगता है कि,
ऐसा क्या पाना था मुझको जो मैंने...

























