वक्त
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
******************
तुझको मुझसे, मुझको तुझसे क्या काम है?
वक्त ने वक्त से मिलाया, वक्त ही जरुरत है!
बेवजह नहीं यूँही वक्त का बर्बाद होना
कुछ और नहीं, मिटने मिटाने की हसरत है!
वक्त पे खामोश रहे, वक्त पे चिल्लाएं
वक्त पे आंसू बहाएँ, वक्त की ही सियासत है!
मैंने जो लिखी इबारत, वक्त ने मिटा दी
खुद के लिखे पे इतराएँ, वक्त वो इबारत है!
दोस्ती और दुश्मनी वक्त की मोहताज है
हम नादाँ, कहीं मोहब्बत कहीं नफरत है!
कोशिश कर ऐ इन्सां, तू वक्त को पढ़ सके
तेरी हो या मेरी, सब की इबादत वक्त है!
परिचय : विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र.
इंदौर निवासी साहित्यकार विश्वनाथ शिरढोणकर का जन्म सन १९४७ में हुआ आपने साहित्य सेवा सन १९६३ से हिंदी में शुरू की। उन दिनों इंदौर से प्रकाशित दैनिक, 'नई दुनिया' में आपके बहुत सारे लेख, कहानियाँ और कविताऍ प्रकाशित हुई। खुद के लेखन के अतिरिक्त उन दि...






















