वेदना
शरद सिंह "शरद"
लखनऊ
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टूटे अरमानो का जबाब कौन देगा?
जो बिखरचुका उस दिल के,
टुकडो का हिसाब कोन देगा?
ख्वाबो के हसीन नजारो के,
बिखरने का हिसाब कौन देगा?
पल पल जो अश्क बहाये..
उन अश्को कााहिसाब कोन देगा?
जो भूल गयी गिनते गिनते रातो को...
उन तारो का हिसाब कौन देगा?
चाद भी रोया था जब मेरे साथ साथ
उस कृन्दन का जबाब कौन देगा?
होठोपे कभी जो आ न सकी..
उन मुस्कानो का जबाब कौन देगा?
कौन देगा कौन देगा?
कौन देगा कौन देगा?
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परिचय :- बरेली के साधारण परिवार मे जन्मी शरद सिंह के पिता पेशे से डाॅक्टर थे आपने व्यक्तिगत रूप से एम.ए.की डिग्री हासिल की आपकी बचपन से साहित्य मे रुचि रही व बाल्यावस्था में ही कलम चलने लगी थी। प्रतिष्ठा फिल्म्स एन्ड मीडिया ने "मेरी स्मृतियां" नामक आपकी एक पुस्तक प्रकाशित की है। आप वर्तमान में लखनऊ में निवास करती है।
आप भी अपनी कविताएं, कहा...
























