पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं
कंचन प्रभा
दरभंगा (बिहार)
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एक पत्र भगवान के नाम लिखा था मैने
भगवान से गुजारिश ये किया था मैने
हे भगवान मेरी माँ मुझे वापस दे दो
बदले में तुम मुझसे चाहे ले लो
हे भगवान मेरे पिता मुझे वापस दे दो
बदले में तुम मुझसे चाहे जो ले लो
मैं माँ की गोद में एक बार सोना चाहती हूँ
पिता से खिलौना की जिद करना चाहती हूँ
हे भगवान एक बार मेरी विनती सुन लो
बदले में चाहे तुम मेरे प्राण ले लो
माँ पिता आज भी बसते हैं दिल की क्यारी में
वो पत्र आज मुझे मिली पुरानी डायरी में
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परिचय :- कंचन प्रभा
निवासी - लहेरियासराय, दरभंगा, बिहार
सम्मान - हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० सम्मान से सम्मानित
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