सच्चाई
वीणा वैष्णव
कांकरोली
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मीठे बोल राह भटकाएंगे, मान यही सच्चाई है।
बुजुर्गों ने समझाया, बात कहा समझ आई है।।
शब्दों में कठोरता, राह नेक उसने दिखाई है।
संग सदा वह खड़ा रहा, जैसे तेरी परछाई है ।।
सच्चाई जग में, सबने सदा ऐसे ही बिसराई है।
अपनी गलती को मनु, तूने नित ही दोहराई है।।
नापाक मंशा मुकम्मल, कभी नहीं हो पाई है।
झूठी राह अपना, हकीकत जिसने बिसराई है।।
झूठ फरेब नकाब लगा, हकीकत छुपाई है।
प्रभु पारखी नजर से, नहीं बचा कोई भाई है।।
कह रही वीणा, यह दुनिया बहुत तमाशाई है।
झूठ दौड़ रहा, सच्चाई की नहीं सुनवाई है।।
सच्चाई पर अड़े रहे, हंसकर जान गवाई है।
मर कर अमरता, कुछ बिरलो ने ही पाई है।।
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परिचय : कांकरोली निवासी वीणा वैष्णव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कवितायें लिखने में आपकी गहन रूचि है।
आप भी अपनी कविताएं, क...


















