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कविता

आयु अपनी शेष हो गई
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आयु अपनी शेष हो गई

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* आयु अपनी शेष हो गई पीड़ा की पहनाई में अब भी सपने सुलग रहे देखे जो तरुणाई में काजल सी काली अंधियारी यह रात ढलेगी संभव आशाएं मुस्काए पूरब की अरुणाई में चैता की वो विरह गीतिका कब तक सिसके कभी संदेशा आने का मिल जाए पुरवाई में इन सांसों की उलझन में क्यों जीवन उलझे हरियाए उपवन भी, कलियों की अंगड़ाई में क्यों ना पाए समझ, झुकी दृष्टि की लाचारी क्यों नहीं डूबकर देखा चुप्पी की गहराई में सहमे-सहमे गलियारे हैं दरकी-दरकी दीवारें पहले कैसी चहलपहल होती थी अंगनाई में जब स्वयं को भूल गए हम, अपने ही भीतर कितना बेगानापन लगे अपनी ही परछाई में मन की सारी व्यथा लिखी, इन गीतों छंदों में पूरे सफर की कथा लिखी पांव की बिवाई में परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० फ...
कलियुग में राम
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कलियुग में राम

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** धनुष बाण कर उर में धारे, धरती से प्रभु भार उतारे, विप्र धेनु सुर संत के हित, अवतारे श्री राम, निशाचर हीन प्रभु करि भूमि को, यज्ञ के रखवाले श्रीराम धनुषबाण पर चाप चढ़ाते, दुष्टो को प्रभु मार गिराते, यज्ञ की रक्षा करते राम। कलियुग में प्रभु हे आजावो, अति दुष्ट आत-ताई जग में, नारी असुरक्षित, संत प्रताड़ित, धर्म गर्त में हे प्रभु आज, धनुषबाण कर उर मे धारो। सनातनियो को शक्ति दो प्रभु, राम-कृष्ण सी भक्ति दो प्रभु, धरती भी करती है पुकार, धनुषबाण ले आओ राम, दुष्टो को संहारो राम। विधर्मीयो को मार गिराओ राम। परिचय : किरण पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जब...
अकेला हूँ मैं
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अकेला हूँ मैं

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सासों का सिलसिला हूँ मैं माया के झन्झावातो मे आवा जाही मे साजो की माटी का पुतला हूँ मैं। पल-पल आथात होता दिल पर पल-पल मे पलक पर अश्रु बटौरता हूँ मैं कहने को कांरवा है कहाँ तक साथ चले। पत्ते उलचती पगडन्डी पर अकेला हूँ मैं। पल मे पीछे पथिक था जाने कहां खो गया उस साथी के वियोग मे अकेला हूँ मैं रवि, चन्द्र भी साथ नही चलते इसी तरह विधी के बन्धन मे बन्धा हूँ मैं अकेला हूँ मैं, अकेला हूँ मैं। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ ...
आदमी पत्थर हो गया है
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आदमी पत्थर हो गया है

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** आदमी पत्थर हो गया है ये कहती हैं पत्थर की दीवारें हृदयहीन कंम्प्यूटर की तरह सदैव चलता रहता है घर में घर तबाह हो गया है... प्लास्टिक, फर्नीचर या स्टील है आदमी... रोबोट की तरह सदा- दौड़ता रहता है आदमी... मानवता बर्बाद हो गयी है...! दानवता आबाद हो गयी है...! अब मानवता के लिए- पैसे की जरुरत है... दानवता को भी उस पैसे की जरूरत है... सब कुछ तबाह हो गया है रिश्तों से घर बनता है ईट, पत्थर, गाटर, पटिया सबकी सब छोटी बड़ी चीजें हैं जिनसे घर बनता है इनको जोड़ने के लिए सिक्कों के सीमेंट की जरूरत है प्लास्टर के बिना सीमेंट के बिना सब गाटर, पटिया, ईट-पत्थर टुकड़े-टुकड़े हो बिखर रहे हैं...! परिचय :-  बृजेश आनन्द राय निवासी : जौनपुर (उत्तर प्रदेश) सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर म.प्र.द्वारा शिक्षा शिर...
स्त्री कमजोर नहीं
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स्त्री कमजोर नहीं

डॉ. मनीषा ठाकरे नागपुर (महाराष्ट्र) ******************** स्त्री कमजोर नहीं होती, बस संवेदनशील होती है, दुनिया की ठोकरें खाकर भी, मुस्कान में शामिल होती है। जो आँसू तुम कमजोरी समझ बैठे हो, वो उसकी सहनशक्ति की पहचान होती है। हर दर्द को सहेज कर भी, वो किसी का संबल बनती है, मुस्कान होती है। वो अगर खुलकर बोले तुमसे, तो यह उसकी सरलता है, साहस है, हर किसी के सामने दिल खोलना, हर किसी की आदत नहीं होती है। तुम समझ बैठे शायद, उसके शब्दों में कोई इशारा होगा, पर वो तो बस मन की उलझनें, किसी अपने से साझा कर रही होगी। उसकी चुप्पी में तूफान छुपे होते हैं, उसकी बातें भी कभी दवा होती हैं। वो रोती है तो मत समझो कमज़ोर है, उसके आँसू भी आग के जैसे होते है। वो लड़ती है अपने भीतर के डर से हर रोज़, संघर्षों की आग में तपकर कुंदन होती है। उसके विश्वास की क़ीम...
अकेली लड़की
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अकेली लड़की

शकुन्तला दुबे देवास (मध्य प्रदेश) ******************** अकेली लड़की हां। मैं अकेली लड़की हूं। तो क्या हुआ? मेरे साथ मैं तो हूं। अपनी सम्पूर्ण सजगता के साथ। मेरी इच्छाएं आकांक्षाएं अपने विस्तार के साथ। हमेशा रहती है मेरे पास। मेरी सहचरी बनकर कभी सपना कभी सखी बनकर। जब इस निष्ठुर संसार में आदमियों की भीड़ में भी। आदमी अपने आपको पाता है नितान्त अकेला। सुनेपन को झेलता हुआ। तब मैं अकेली नहीं। मैं देती हूं अपने आपको सहारा। एक सुंदर संसार प्यारा मेरे अन्तस का संसार हरा-भरा सबसे न्यारा। जिसमें व्याप्त सकल रुप मे मैं-मैं-मैं और मैं। संसार हरा भरा परिचय :- शकुन्तला दुबे निवासी : देवास (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, समाज शास्त्र, दर्शन शास्त्र। सम्प्रति : सेवा निवृत्त शिक्षिका देवास। घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
नाशवान
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नाशवान

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** शीघ्र खराब होने वाली चीज नाशवान कहलाती है। फल और सब्जियां इसके अंतर्गत आती है। ******* दुनियां की प्रत्येक वस्तु नाशवान है। सकून से रहिये किस चीज का गुमान है? ******* मानव शरीर भी नाशवान कहलाता हैं। क्योंकि जिसने जन्म लिया है वह मृत्यु को जरूर पता है। ******* मनुष्य पर माया का असर आया है। तभी तो उसने नाशवान संसार को अपना बनाया है ******** आज आप हो कल कोई आपकी जगह आयेगा। एक नाश होगा और दूसरा पैदा होता जायेगा। ******* मत करो घमंड यह शरीर नाशवान कहलाता है। मिट्टी में जन्म लेता और मिट्टी में मिल जाता है। ******* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। आ...
कब आएगा राम राज?
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कब आएगा राम राज?

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** मिट जाए सबकी गरीबी, सबके पास खाने को अन्न हो। सुख-सुविधा सबको मिले, सबका तन-मन प्रसन्न हो।। कार्यालयों में भटकने के लिए, कोई डिग्रीधारी ना मजबूर हो? सबको मिले मनचाही नौकरी, विकराल बेरोजगारी दूर हो।। किसान को अपना हक मिले, कर्ज से मिले उनको मुक्ति। आत्महत्या के लिए ना हो विवश, सरकार करे ऐसी कोई युक्ति।। मजदूर श्रम से नवनिर्माण किया, असंभव को संभव कर दिखाया है। काम खत्म होते ही मिले मजदूरी, त्याग और समर्पण ने रंग लाया है।। ज्ञान का प्रसार हो जन-जन में, अब ना कोई असभ्य, अज्ञानी रहे। बुराई, असत्य का त्वरित हो दमन, जनता सचेत और सत्यवादी बने।। चाहे नारी निकले अंधेरी रात में, रावण का छूने की हिम्मत ना हो। नियम और सुरक्षा हो पालनार्थ, भय और डर का हिमाकत ना हो।। परिचय : अशोक कुमार यादव निवासी : मुंगेली, (...
आओ स्कूल चले
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आओ स्कूल चले

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** आओ हम स्कूल चले नव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जो बंधन भव का आओ मिलकर उसको पार करें, आओ हम स्कूल चले ..... जाकर स्कूल हम गुरुओं का मान करें बड़े बूढ़ों का कभी न हम अपमान करें, आओ हम स्कूल चले....... जाकर स्कूल हम दिल लगाकर पढ़ेंगे मौज मस्ती और खेलकूद भी खूब करेंगे, आओ हम स्कूल चले....... क ख ग का गान कर हम हिंदी का मान बढ़ाएंगे। एक दो तीन चार पढ़ कर गणित का ज्ञान भी करेंगे। आओ हम स्कूल चले....... परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कव...
स्त्री
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स्त्री

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* उन्हें पुकारा गया शहर या गाँव के नाम से खंडवा वाली पिपरिया वाली देवरी वाली छिंदवाड़ा वाली. कभी बच्चों के नाम से बिट्टू-छोटू की माँ मनी की माँ लकी की माँ. प्रिया रिया की मां पति के पेशे से भी हुई इनकी पहचान मास्टरनी डाक्टरनी मील वाली भट्टा वाली. तो किसी ने कहा विधवा बाँझ बदचलन बेहूदा या ख़राब औरत। औरतें जो खपती रहीं मकान को घर बनाने में जिम्मेदारियाँ निभाने में पति के नख़रे उठाने में बच्चों को लायक बनाने में ताउम्र कोई नहीं जान पाया उनका असली नाम सिवाय घर की एक दीवार के यहाँ लटकी हुई तस्वीर में वो साथ झूलता है। परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० फरवरी निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्ष...
दो श्वानों की बातेँ
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दो श्वानों की बातेँ

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** एक घरेलु श्वान ने एक दिन, सड़क पर पड़े श्वान की दशा देखी! दुबला पतला शरीर खंडहर बन चुका था! उसकी दुर्दशा देख घरेलु श्वान को छटपटाहट हुई, उसने सड़क के श्वान से पूछा- कहाँ रहते हो?? ये कैसा हाल बना है तुम्हारा?? क्या यहाँ इंसान नहीं रहते?? सड़क का श्वान घिसटते पैरों से, आधा गला शरीर, उसके घाव से रक्त की बूंदे रिस रही थीं, आगे बड़ने की कोशिश करते हुए, अपने दर्द से भरे शरीर को समेटते हुए बोला- प्रत्येक दिन हमारी और हम जैसे हजारों कि जिंदगी मौत से आँख- मिचौली खेलती है, खाना- पीना हमारे भाग्य में नहीं होता है , कभी किसी दरवाजे पर आस लिए पहुंचते हैं , वहाँ डंडे की मार, दुत्कार और प्रहार मिलता है , कभी कहीं हमको जिंदा आग में जलाया जाता है , कभी आग से नहलाया जाता है ! इतना ही नहीं हमारे ...
बिटिया का बचपन
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बिटिया का बचपन

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बिटिया का बचपन सुन्दर था पायल की रुनझुन थी घर में हलचल थी। आंगन मे तितली संग नाचती बाबा के कंधो पर चढ जिद करती मां से रुठती तो दादा को मनाती लाडली बिटिया प्यारी परी सी। घर, आंगन में शोर मचाती कभी लजाती, कभी सकुचाती डर कर पेडों के पीछे छुप जाती सारे घर से, प्रश्न पुछती कभी स्वंयम ही उत्तर देती। मैं करुँगी, मैं कर दूंगी की रट लगाती हठ मे जाने कब बचपन बीत गया सयानी बिटिया सहमी सी रहने लगी न जाने बचपन कहाँ खो गया। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से...
हमारा बिहार
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हमारा बिहार

डाँ. बबिता सिंह हाजीपुर वैशाली (बिहार) ******************** जिला मोतिहारी बसें, सोमेश्वर महादेव। एक बार दर्शन करो, दुख सब हरें स्वमेव।। बैल राज्य का पशु है माना। शिव वाहन है सब जग जाना।। सोनपुर लगे मेला भारी। पशुओं की हो खरीददारी।। नीले नभ में पंछी घेरा। वन वृक्षों पर नीड़ वसेरा।। मधुबन में जब फूल खिले हैं। गौरैया को मोद मिले हैं।। गौरैया पक्षी सम्माना। दे उपाधि जन-जन हरषाना।। कोयल गावे जब सतरंगी। भरे उमंगें अति मनरंगी।। मलय श्वास सौरभ से लेकर। मदिर आस है अलि के अंतर।। राज्य पुष्प में गेंदा आता। हर मौसम में मन भरमाता।। वृक्ष लता के प्राण अनिल है। कचनारों पर रंग सकल है।। कर्म द्वार उदयाचल खुलता। श्रृंगार हीरक कुंज करता।। प्रथम विश्व गणराज्य है, माना गया बिहार। विल्ब वृक्ष में बस रहे, शंकर पालनहार।। पीपल राज्य वृक्ष में शोभित। थल नभचर को करता म...
नव बना रहे हिंदुस्तान
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नव बना रहे हिंदुस्तान

डॉ. निरुपमा नागर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** संवत विक्रम, करते हैं तुम्हें नमन। "नाल" बन सूर्य राजा संग लाये नव चितवन। है नवागत गुड़ीपड़वा, चैत्र उत्सव का जलवा, बैसाखी देती मन पुरवा। राजीवलोचन आये पलना झूलेलाल की हुंकार महान नवरोज़ की भी है शान अमृतफल से लाड गया उद्यान। आ गया, नव पल्लव, नव धान। वसुधैव कुटुंबकम् की तुम पहचानो। नव निधि साथ के लिए, नव बना रहे हिंदुस्तान। संवत विक्रम "नाल" कहलाते हैं और स्वामी सूर्य भगवान हैं परिचय :- डॉ. निरुपमा नागर निवास : इंदौर (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, ...
चल फिर मिलते हैं
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चल फिर मिलते हैं

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** दो दोस्त, एक साथ पढ़ाई, एक साथ शैक्षणिक प्रगति, एक सामान्य, एक में महत्वाकांक्षा अति, हुई पढ़ाई पूरी, पर जिंदगी की असल परीक्षा अधूरी, एक जल्द कुछ करना चाहता था, एक सोच समझ आगे बढ़ना चाहता था, पहले ने किसी और की दरी उठाना शुरू किया, कालांतर में बड़े नेता का महत्वपूर्ण पद हासिल किया, दूसरे ने रात दिन अलख जगाना शुरू किया, खुद को समाज और मिशन को सौंप दिया, पहले वाले की एक आवाज पर सैंकड़ों लोग इकट्ठे होते थे, जिनके सपने उनके पीछे पूरे होते थे, दूसरा इकट्ठा होने का आह्वान कभी नहीं करते थे, जागृति फैला दूसरों को जगाते और खुद भी संवरते थे, जब दोनों मिलने पहुंचे तो दृश्य अद्भुत था, पहला बेरोकटोक कहीं भी जाता था, दूसरा समस्या देख उसे दूर करने रुक जाता था, आप ही बताओ कौन कामयाब है, एक सत्ता...
वो पुरुष ही है
कविता

वो पुरुष ही है

आशीष तिवारी "निर्मल" रीवा मध्यप्रदेश ******************** वो पुरुष ही है जिसने साथ निभाया जन्म से मरन तक वो पुरुष ही है जो साथ चला ठिठुरन से जलन तक।। वो खुल कर ना हंसा ना रोया अब्र से कब्र तक खुद को संभाल कर रखा जब्र से सब्र तक।। चलता ही रहा वह सवेरे से रात तक थका नहीं कभी चलती उखड़ती सांस तक।। खुद को संभाले रखा घटते-बढ़ते रक्तचाप तक माथे का पसीना पोंछते और देह को मरोड़ते ताप तक।। किरदार को निभाया खूब नींद से लेकर जाग तक रहा सदैव मर्यादा में हंसी और ऊंचे विलाप तक।। असफलता पर कटी नाक तक और सफलता पर रोती आंख तक।। हर अवसर पर जन्मदिन से ब्याह तक खुद से जुड़े सारे रिश्तों के निबाह तक।। सहज सरल स्वभाव से लेकर अक्खड़ तक धुंए से लेकर उड़ते धूल धक्कड़ तक।। घर के काम लेकर दफ्तर तक उम्र पांच से लेकर पच्चहत्तर तक।। हर रिश्ते को दिल से ...
चिंतन
कविता

चिंतन

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चिंतन से चिंता मिटे, ध्यान से मिटे अवगुण, प्रभु नाम से मिट जाये ८४ के फन्द। नींद से शरीर स्वस्थ रहे, चलने से नहीं करे परहेज़, खान-पान से खून बढे, सब रोगों का अंत, गीता से प्रभु ज्ञान मिले, मिटे शोक संताप, रामायण से आदर्श चरित्र, घर-घर हो जाये राम। योग से सब भोग भगे, सुंदर रहे शरीर, हनुमान से भूत भगे, काया हो जाए पवित्र। परिचय : किरण पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" से सम्मानित ४. १५००+ कविताओं ...
कौन हैं ये लोग
कविता

कौन हैं ये लोग

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** कौन हैं ये वृद्ध लोग एक बूढ़ा आदमी एक बूढ़ी औरत! कहने को इनके पास कोई अपना नहीं होता, ये दूसरों के बच्चों में खुद की औलाद का बचपन ढूंढते हैं! ये वृद्ध लोग अक्सर रेलवे-स्टेशन और एयरपोर्ट पर नजर आते हैं कभी कोई इन्हें लेने या छोड़ने नजर आता है! ये सदैव बूढ़े और कमजोर ही दिखते हैं व्हील चेयर और लाठी इनका सहारा होते हैं! जब ये समर्थ और इनके हाथ भरे होते हैं, इनके आसपास लोग होते हैं, हाथ खाली होते ही बोझ बन जाते हैं! इनकी रफ़्तार धीमी होती है, जिंदगी की दौड़ में पीछे छूट जाते हैं! जीवन भर सही राह पर चलते धर्म-कर्म निभाते, उम्र के इस पड़ाव पर अपना वज़ूद ढूंढते हैं, और एक दिन इस दुनिया से कूच कर जाते हैं!! परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी पति : श्री राकेश कुमार च...
चंचल
कविता

चंचल

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** दृग चंचल मन चंचल चंचल बिटिया, गौरी चंचल मृग चंचल, मृग दृग चंचल आखेट के लिए आते हिंसक के पग चंचल। चंचल सरिता, झरना चन्चल जल की बून्दे, फुहारे चंचल भागती चंचल रश्मि छाया सगं। चंचल पवन, चंचल अग्नि पतझड चंचल पथ पर पडे पर्ण चंचल। पर पर स्थिर, धैर्यवान धरा इन सब को सवारती है सम्भालती है आश्रय देती है मानव जगत के लिये जीव जगत के लिये। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रह...
चतुरंग
कविता

चतुरंग

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** जब अपने ही शतरंज का खेल-खेलने लगते हैं तो पराया भी अपने लगने लगते है। जब हमदर्द ही दर्द देने लग पड़ते हैं तो बेदर्द भी हमदर्द लगने लगते हैं। जब फूल भी चुभने लगते हैं तो दर्द भरे कांटे भी अपने लगने लगते हैं। जब बिना कसूर के भी लोगों नासूर जैसे चुबने लगे तो कसूर भी अपने लगने लगते हैं। जब मिठास भरे लोग भी कड़वाहट उगलने लगते हैं तो कटु वाणी भी मधुर स्वर लगने लगती हैं। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी र...
झंझावात
कविता

झंझावात

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जब वायुमंडल में प्रचंड रूप से आंधी और तूफान आता है। यही मौसम झंझावात कहलाता है। ******* चमकती है आकाश में बिजली और ओले भी बरसते है। चारों तरफ होता है पानी पानी बादल भी गरजते है। ******* जब जब झंझावात आता है मुल्क में बर्बादी आती है। और हमारे जीवन को अस्त व्यस्त कर जाती है। ******* झंझावत प्रकृति का प्रकोप है जब हम प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करते है तो झंझावत आता है। और यही फिर प्रकृति का प्रकोप कहलाता है। ******* रखें पर्यावरण का ध्यान तभी हम झंझावात से बच पायेंगे। नहीं तो व्यर्थ में जन-धन की हानि पायेंगे। ********* झंझावात कभी कभी हमारे जीवन में भी आते है। यदि हम सावधान न रहें तो बड़ी तबाही कर जाते है। ******** परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड...
गिनते रहिये दिन
कविता

गिनते रहिये दिन

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है जब कुछ कुछ खालीपन महसूस होता है, दिल गुजरे जमाने को याद कर रोता है, जो सिर्फ यादों में ही रहेगा, दुबारा आ जाऊं वक्त नहीं कहेगा, इधर समय गुजरता जाएगा, आयु साल दर साल घट जाएगा, कम होता जाता है दबदबा, कोई बचता नहीं मुंहलगा, आपको आपसे ही कोई नहीं मिलायेगा, गुजरा पल-पल पल तड़पायेगा, रहने लगेंगे सिर्फ यादों के सहारे, एक छोर में खुद तो दूसरे छोर में बाकी सारे, समझना न समझना खुद के ऊपर होगा क्योंकि बतियाएंगे रोज नदी के धारे, यदि किया है कुछ ऐसा काम, जो रख दे बरसों तक नाम, तो सफल रहेगा किसी का भी जीना, कब भागना पड़े सब छोड़ तब तक गिनते रहिये दिन, साल, महीना। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाण...
तर्क
कविता

तर्क

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* दुनिया के सबसे सुन्दर फूल की तरह खिलता है, एकदम मानवीय प्यार की तरह, मेहनत की ज़मीन पर उगे अनुभव के पौधे पर शोभा पाता है तर्क मेहनत करने वालों के पास। तर्क सुन्दर होता है क्योंकि वह बताता है कारण का कार्य से सम्बन्ध वह बताता है चीजों के होने के बारे में, गतियों के रहस्यों के बारे में। बताता है वह रहस्य, अन्धकार और कृत्रिमता तथा निरुपायता से मुक्ति के बारे में इसलिए ज़रूरी है तर्क करना और लोगों को बताना तर्क के बारे में। जो चाहते हैं दुनिया को चलाना ऐसे ही जैसे कि वह चल रही है वे डर जाते हैं जब हम शुरू करते हैं तर्क करना I परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० फरवरी निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इं...
होली में हो ली
कविता

होली में हो ली

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** होली में हो ली, कौन किसके साथ हो ली, सास, ससुर के साथ हो ली, जेठानी, जेठ के साथ हो ली, नंदन, नंदोई के साथ हो ली, भाभी, भैया के साथ हो ली देवरानी, देवर के साथ हो ली, और बाकी जिसका मन पड़ा वह उसके साथ हो ली, बचे हम दोनों हम महाकाल की गैर देखने इनके साथ हो ली मिल गए सब महाकाल की गैर में, खुली पोल सबकी, कौन किसके साथ होली में हो ली, कोई ठंडाई, कोई भांग, कोई रगड़ा, कोई गोली होली में गोली और गोली में हो ली, आया नशा होली के रंगों में महाकाल की टोली। परिचय : किरण पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन...
शक्ति
कविता

शक्ति

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** मकड़ियों के जालो में बैठी भूखी मकड़ियां इंतजार करती कीट पतंगों का कब फंसेंगे ये जाल में ठग लोग भी बनाते ठगने का जाल कोई न कोई फंसेगा झूठ फरेबों के जाल में। मकड़ियां सूने घरों में ज्यादा बनाती जाले ठग भी कुछ ऐसा ही करते जहाँ हो सूनी सड़क हो या घर मकड़ियों का किसी से वास्ता नहीं होता उन्हें अपने काम से मतलब ठगो से बुद्धिजीवी इंसान कैसे ठग जाते ? और फंस जाते कीट पतंगों की तरह उनके रचे हुए जाल में। दीपावली पर सफाई में महिलाये कर देती मकड़ियों के जाले साफ़ इंतजार है महिलाएं कब करेगी इन ठगो को साफ़ क्योंकि कुछ मर्दो को मेहनत करना नहीं आता मेहनत की रोटी क्या होती उन्हें मालूम नहीं जबकि ठगी रोकने का काम बुद्धिजीवी मर्दो का है ठगी पर अंकुश नहीं लगा पाए जब मर्द महिलाओं पर ही अब विश्वास बचा है शेष उनक...