फागुनी बयार
अमिता मराठे
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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फागुन की हर घड़ी,
रंगीला एहसास दे जाती।
शीत भय को हर लेती,
मोहक बहारें वसन्त की।
टेसू के फूलों की,
सरसों की पीली चूनरी
ओढ़े धरा गौरी प्यारी सी।
उमंग उल्लास से भरी
फागुनी बयार बौराई सी।
पतझर के बाद सजती,
ये शाखाएं नव कोंपलों से।
आम्रमंजरी से शोभित होती,
अमराई मन मोह लेती।
डाल पर बैठी कुहू कुहू करती,
कोयल झूमने लगती।
ऐसे फागुनी बयार खुशी की,
दस्तक दे जाती,
पुराने किस्सों को ताजा कर देती।
लगी मस्ती की पाठशाला,
चहुंओर गूंज उठी,
फागुनी गीतों की ध्वनि ।
ऐसे फागुन की हर घड़ी,
रंगीला एहसास दे जाती।
परिचय :- अमिता मराठे
निवासी : इन्दौर, मध्यप्रदेश
शिक्षण : प्रशिक्षण एम.ए. एल. एल. बी., पी जी डिप्लोमा इन वेल्यू एजुकेशन, अनेक प्रशिक्षण जो दिव्यांग क्षेत्र के लिए आवश्यक है।
वर्तमान में मूक बधिर संगठन द्वारा संचालित आई.ड...





















