आगत का स्वागत विगत को अलविदा
ज्ञानेन्द्र पाण्डेय "अवधी-मधुरस"
अमेठी (उत्तर प्रदेश)
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इंकलाब आएगा खुशी के गीत गाए जा ।
एकता अखंडता के साज को बजाए जा ।।
राह में जो मुश्किलें मिलीं थीं भूल जा उन्हें
क्या गिला अतीत से मिला है जो सजा उन्हें
वक्त से मिला कदम तू कदम बढ़ाए जा ।।
एकता अखंडता...
धूप-छाँव भी तो जिंदगी का एक अंग है
दूर होगी कालिमा मन में यदि उमंग है
साम-दाम-दंड-भेद नीति को निभाए जा ।।
एकता अखंडता...
भाषा-धर्म-जाति-पाँति में नहीं विभेद हो
कर्म भी करो वही कि ना कभी भी खेद हो
मिल-मिला के नेह से प्रेम रंग चढ़ाए जा ।।
एकता अखंडता...
शौर्य में वृद्धि हो मान और शान हो
स्वस्थ रहें सभी मर्यादा का भी भान हो
दर्श दर्प का न हो सद्भावना बढ़ाए जा ।।
एकता अखंडता...
आ गया नवीन वर्ष तू आरती उतार ले
पथ स्वयं प्रशस्त कर तू भविष्य सँवार ले
क्या विषाद है तुझे हँस के मिटाए जा ।...
























