क्यों लेते हों भगवान परीक्षा
कमल किशोर नीमा
उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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क्यों लेते हों भगवान
परीक्षा अपने भक्तों की।
सहते हो स्वयं भी पीड़ा
हरने अपने भक्तों की।
क्यों लेते ...
राम रुप में धरा पर आए
सुन पुकार ऋषियों की।
यज्ञ देव का मान बढ़ाया,
गोद भरी कौशल्या की।
असुरों का उद्धार था करना
राह चुनी वन जाने की।
वचन बना आधार पिता के,
मति मंद करी कैकेयी की।
क्यों लेते …
परित्याग कर बन्धन सारे,
वेश धारण कर विरक्तियों की।
चौदह वर्ष भ्रमण कर वन में,
निद्रा हर ली लक्ष्मण की।
देना था संदेश जगत् को,
भाई प्रेम के बन्धन की।
चरण पादुका पूजी भरत ने,
वियोग में श्री राम की।
क्यों लेते ...
बाली वध कर सेना बनाई,
सुग्रीव संग हनुमान की।
सन्तों मुनि यो से पाईं शिक्षा,
दिव्यास्त्रों के संधान की।
राम से बड़ा नाम राम का,
ये महिमा सेतु पाषाण की।
रावण वध कर लंका ढहाईं,
ली अग्नि परीक्षा सीता ...












