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स्तुति

मेरे खुदा
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मेरे खुदा

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** मैं फकीर हूं, तेरे दर का खुदा मेरी आजमाइश न कर। तू पीर है मेरा, मेरे खुदा मेरी जग हंसाई न कर। मैं कमजोर लाचार हूं, मेरे खुदा मेरा तू हम राही बन। मैं अनजान हूं, तेरी इस कायनात से मेरे खुदा तू मेरा हमराज बन। मैं मुरीद हूं तेरा मेरे खुदा, तू अब मेरा मुर्शिद बन। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशि...
हनुमान जी की महिमा…
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हनुमान जी की महिमा…

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** भक्त हनुमान जी हैं दयालु बहुत, राम भक्तों की रक्षा वे करते सदा। दैत्य माने नहीं राम महिमा को जो, उनपे हनुमान जी ने चलाई गदा। भक्त हनुमान जी...... राम का नाम लेता विभीषण मिला, मित्र माना उसे,अपना परिचय दिया। हो गया धन्य वो,राम सेवक से मिल, माता सीता का उसने,पता था दिया। गये वो वाटिका माँ के दर्शन किये, उनकी सांसों में बस "राम" चलता सदा। भक्त हनुमान जी...... दम्भी रावण को सद्ज्ञान देने के मित, माँ से अनुमति ले विध्वंस की वाटिका। छोड़ा ब्रम्हास्त्र तो नमन कर बंध गए, छोड़ने की नहीं की कोई याचिका। दिया सद्ज्ञान रावण को दरबार में, वो अहंम में था डूबा न उसको जँचा। भक्त हनुमान जी........ दिया रावण ने आदेश मारो इसे, आ विभीषण ने नीति बताई उसे। शत्रु का दूत है,अन्य कुछ दंड दो, नीति सम्मत नहीं है न मारो इसे। पूँछ ...
योगेश्वर श्रीकृष्ण
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योगेश्वर श्रीकृष्ण

निरुपमा मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** हे परम ब्रह्म श्री कृष्ण! गोलोक त्याग धरा पर आए; जगत कल्याण हेतु, असुर विनाश हेतु, ज्ञान भक्ति कर्म का मार्ग दिखाने, एवम् धर्म संस्थापना हेतु। अवतरित हुए तुम, कारागार के बंधन में; फिर अशेष संघर्ष यात्रा, कंटकपूर्ण रहा हर पग; और आसुरी शक्तियों का आतंक, जिससे आर्तनाद कर उठा जग। बाधाओं का अतिक्रमण कर, हे कृष्ण! सफल योद्धा बन तुम, जीत गए हर युद्ध, जाना विश्व ने तुम्हें अपराजेय, प्रबुद्ध। प्रेम की कोमलता तथा उसकी शक्ति को, कण-कण में फैलाकर, प्रेम भाव से सराबोर संसार किया; प्रेम के शाश्वत तत्व को, मानव मन का आधार दिया। ब्रह्म और जीव की एकात्मता को, राधा संग रास रचाकर, कण-कण में विस्तार दिया। सोलह कला संपूर्ण तुम, योगेश्वर, पुरुष पूर्ण तुम। दीन सुदामा के परम सखा, भक्त के भगवान हो; गीता ज्ञान सुनान...
गज और ग्राह
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गज और ग्राह

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** प्यासे गज ने सरवर में पग डुबाया घात लगाये बैठा ग्राह, दबे पाँव आया चींखा गज चींघाड मार करुण स्वर में ग्राह ने उसका पाँव, निज मुँह में दबाया इधर उधर दृष्टि फिरा कर हो व्याकुल गज ने रक्षा हेतु सबको खूब बुलाया कारण रुप ! हे करुणाकर ! हे अविनश्वर रक्षा हेतु विह्वल हो के गुहार लगाया हे त्रिपुरारि ! हे मुरारी ! हे परमेश्वर ! मैं आकुल, अधम अति, तुम्हें भुलाया सुन करुण पुकार उठ भागे दीनेश्वर हो सवार, गरुड को सरपट दौड़ाया ग्राह को चक्र से कर निहत अपनी आकुल गज को ग्राह से मोक्ष दिलाया करुणामय भगत हितकारी जगदीश्वर भगत हित, निज करुणा को बरसाया। परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा निवासी : अलीगंज लखनऊ शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड., स्नातक कक्षा और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन...
शारदे माँ
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शारदे माँ

महेन्द्र सिंह कटारिया 'विजेता' सीकर, (राजस्थान) ******************** शारदे माँ वन्दना स्वीकार करों। दो ऐसा वरदान, की नैया पार हो। शारदे माँ......। ज्ञानदे चरणों में, अपने स्थान दो। बनें नेक दिल इंसान, की ऐसा ज्ञान दो। मिटा अज्ञान हिये से, विवेक का उजास करों। शारदे माँ.......। जय हंस वाहिनी पद्मासिनि निर्मल हृदय कर वीणावादिनी मिटा हर दोष, शिष्टता का संचार करों। शारदे माँ......। हो तेरी मेहर तो, सदा उत्तम कर पाएंगे। परहित में हम बड़ा, नेक कर जायेंगे। जीवन शुद्धता का बंदनवार करों। शारदे माँ.......। सर्वत्र ज्ञान का प्रकाश हम फैलायेंगे। निज राष्ट्र हो शिखर पर, ऐसे कदम उठायेंगे। माँ भारती विश्वबंधुत्व का भाव भरो। शारदे माँ .......। परिचय :- महेन्द्र सिंह कटारिया 'विजेता' निवासी : सीकर, (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह...