बेरोजगार हूँ साहब
प्रीतम कुमार साहू
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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बेरोजगार हूँ साहब! मै बेईमान तो नहीं
दिल में मेरे हजारों अरमान तो नहीं..!!
नौकरी सबूत नहीं है अच्छे इंसान होने का
इंसान हूँ मैं इंसानों से अलग तो नहीं..!!
अपनी जिंदगी कि मैं लड़ाई लड़ रहा हूँ
सपनों के लिए बस आशियाना बुन रहा हूँ..!!
अपनों से गीला नहीं गैरो से शिकवा नहीं
रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहा हूँ..!!
भविष्य की चिंता मुझे सताती है हरपल
जख्म मेरे रोज़ नए हो जाते है पल पल..!!
सहम सा जाता हूँ लोगों का सवाल सुनकर
ना पूछा कर क्या कर रहा है आज कल ?
ना देश लूट रहा हूँ, ना देश चला रहा हूँ
ना हत्या कर रहा हूँ, ना फरेब कर रहा हूँ..!!
ना कोई गुनाह किया हूँ, ना गुनहगार हूँ
रोजगार की तलाश करता मैं बेरोजगार हूँ..!!
आखिर ये सवाल क्यों पूछते है लोग मुझसे
क्या रिश्ता है जमाने में उनका और मुझसे..!!
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