नमन उन शहीदों को …
इंद्रजीत सिहाग "नोहरी"
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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भारत आजाद कराने, दीवानों की वो टोली चली थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
न जाने कितने परवानों ने, सीने पर खाई गोली थी,
मन में अडिग संकल्प लिए, उन्होंने ही क्रांति जगाई थी।
इतिहास के पन्नों में पढ़ लेना, आजादी जिनकी दीवानी थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
माँ भारती की मुक्ति को, वीरों ने हँसकर कुर्बानी दी थी,
कोई कैसे कह दे हमको, केवल अहिंसा से आजादी मिली थी?
हाँ यह भी पढ़ना, कितनी 'लक्ष्मी' रणचंडी बन लड़ी थीं,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
स्वातंत्र्य-यज्ञ की वेदी पर, कितनी ही माँओं की गोद सूनी थी,
न जाने कितनी बहनों ने, अपनी राखी वाली कलाई खोई थी।
खदेड़ दिया फिरंगियों को, जमकर धूल चटाई थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
जह...


















