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एक नई शुरुआत करें

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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माह में एक बार ही सही
कभी कोई ऐसा दिन
या एक ऐसी रात
बहुत जरुरी है जो
सिर्फ खुद के लिए हो
खुद की खुशी के लिए हो.

जिसमें कोई रोक टोक
कोई हिचक न हो
जो भाए उसके
ही साथ खुलकर जीना
जो मन करे, दिल कहे
दुनिया को भूलकर
सारी जिम्मेदारियां
एक तरफ रखकर
बस चुरा लेना
कोई चरम आनंद का लम्हा
वक्त की डायरी से.

बस खुद के लिए
अपनी मस्ती में
मस्त होकर
ख्वाहिशों को
खुलकर जीना
जरूरी है
बेहद.

तो इस भागदौड़ वाली
समझौतों से भरी जिंदगी
इसकी उलझनों से
लिपटी जद्दोजहद को
बिल्कुल परे धकेलकर
खुद की परवाह में
एक नई शुरुवात करें.

अपने लिए माह में
एक दिन या एक रात
तृप्ति पल जरूर चुराएं
नीरस जिंदगी में कुछ
जगमगाहट भरने के लिए
खुलकर जीने के लिए
मन को छोटी छोटी
बेसुमार खुशियों से
भरने के लिए…..!

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।


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