प्रीत पिया की याद सताए
अशोक पटेल "आशु"
धमतरी (छत्तीसगढ़)
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आयो पावस बरसे बरखा
यह तन-मन अब तड़पायो।
दूर गयो परदेश पिया जी
प्रिया का मन है तरसायो।
पिय मिलन की आस में
विरहीन नीर है बहायो ।
यादों के गहरी सागर में
डूबती सी है नजर आयो ।
मन में प्रीत अगन लगे है
पल-पल धधकता जाए रे।
आ जाओ पास पिया तुम
तुम से शीतल हो जाए रे ।
प्रीत पिया की याद सताए
मन तड़पा -तड़पा जाए।
तुम बिन अब चैन नही है
अब तुमसे रहा न जाए।
आ जाओ प्रियतम मेरे
प्रीत से तन-मन भर दो।
प्रीत में तेरे मैं रंग जाऊँ
मन की पीड़ा मेरा हर दो।
परिचय :- अशोक पटेल "आशु"
निवासी : मेघा-धमतरी (छत्तीसगढ़)
सम्प्रति : हिंदी- व्याख्याता
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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