ऐसी हवा चली कि …
विजय वर्धन
भागलपुर (बिहार)
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ऐसी हवा चली कि
रिश्ते बिगड़ गाये
जो कुछ बचा था दुनिया
की आँखों में गाड़ गाये
हमने तो उनको अपना
बनाया था जिगर से
वो देखते ही देखते
पत्ते से झड़ गाये
माँ बाप किसके साथ
रहेंगे सवाल पर
दो भाई इस विरोध में
आपस में लड़ गाये
क्या दोष अहिल्या का
था जो शपित हुई भला
गौतम ने उसको नारी
से पत्थर में जड़ गए
द्रोपदी की एक गलती
से क्या क्या न झेली वो
सारे ही कौरव पाण्डेवों
के पीछे ही पड़ गए
परिचय :- विजय वर्धन
पिता जी : स्व. हरिनंदन प्रसाद
माता जी : स्व. सरोजिनी देवी
निवासी : लहेरी टोला भागलपुर (बिहार)
शिक्षा : एम.एससी.बी.एड.
सम्प्रति : एस. बी. आई. से अवकाश प्राप्त
प्रकाशन : मेरा भारत कहाँ खो गया (कविता संग्रह), विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित ए...


















