रक्कासा
धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)
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सजी है महफ़िल कोठे पर
इश्क़ के प्यासे
हुस्न के दीवाने
जमा हो रहे कोठे पर।
भूख से तड़पते
दवा के लिए रोते
अपने मासूम के लिए
माँ नीलाम हो गई कोठे पर।
आँसुओं में डूबे घुँघरू
बजना करते है शुरू
होशमंदो की उलटबाँसी में
ममता फँसी है बेबसी में
दूध रोटी के सवाल पर
रक्कासा नाच रही कोठे पर।
बहते आँसुओं को अदा समझ
वाह वाही कर रहे नासमझ
चिल्ला रहे सिक्के उछाल कर
पड़ रहे चांटे गुरबत के गाल पर
रक्कासा नाच रही कोठे पर।
सितार सिसक रही
तबले पर उदासी छा रही
हारमोनियम रो रही
बिखरे पड़े है फूल मोगरे के
कुचले हुए जमीन पर
रक्कासा नाच रही कोठे पर।
उजाले के पीछे कौंन देखे अंधेरा
जरूरतों ने जिंदगी को आ घेरा
जिंदगी तेरा हर फैसला कबूल
मत रो याद कर के अपनी भूल
मैंने जीना सिख लिया है
आंसू पीना सिख लिया है
चमकते जो किरदार उजाले में
वही चेहरे चले आते है
स्याह रात में यहाँ...
























