यह जिन्दगी है जनाब
रमेश चौधरी
पाली (राजस्थान)
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यह जिन्दगी है जनाब,
ऐसे ही नहीं महकेगी,
इन फूलों की खुशबू से
फूलों की खुशबू से,
महक सकता है वातावरण
पर जिंदगी तो महकेगी
इन काटो की सूलो से,
यह जिन्दगी है जनाब
तन मन को प्रसन्न कर देगे,
यह फूलो की सुंदरता
पर जिंदगी को प्रसन्न नहीं
कर पाएंगे यह फूलो की कोमलता
यह जिंदगी है जनाब
इसे फूलों की शया से
नहीं सवारी जा सकती है,
इन्हें तो काटो की
शया से सजाना होगा,
यह जिन्दगी है जनाब,
कभी तो खुशियां समाई
नहीं जाती,
कभी तो खुशियां मनाई
नहीं जाती,
यह जिन्दगी है जनाब,
झाड़े की रजाई छोड़ के,
सूर्य की गर्मी तोड़ के,
खड़े हो जावो अपने सपनों पर,
जब तक ना झुको
तब तक सपने अपने न हो जाएं।
यह जिन्दगी है जनाब,
कभी अपनों की तनहाई सताएगी
कभी इश्क के लम्हें तड़पपाएंगे,
यह जिन्दगी है जनाब,
यह रीट के ख़्वाब बोहत बड़े है,
इसे पाने के लिए बोहत खड़े है,
छोड़ दो अपनी...





















