धरा पर पग धरें…
सौ. निशा बुधे झा "निशामन"
जयपुर (राजस्थान)
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शम्भू तू, शिवशक्ति तू,
धरा-व्योम की भक्ति तू।
ॐ से उठे स्वर तेरा,
चतुर्थ में समृति तू। ॥१॥
त्रिनेत्र में नाव जले,
डमरू की ये ऊंची आवाज।
संस्कृति का आधार तू,
कालान्तक, शुभ भाव। ॥२॥
गंगाजल डूबे तुम,
भस्म भाल पर छाय।
डांस जब करे नटराज तू,
एकजुट हो जाओ सब लोक घनेरे। ॥३॥
सर्प हार, कर त्रिशूल धरे,
चंद्रभाल मन शांति परम।
शिवरात्रि की वह रजनी,
तेरे नाम से जगे सवेरे। ॥४॥
निर्गुण, फिर सगुण लगे,
वैराग्य भी, अनुराग जगे।
भक्ति-पथ के दीपक तू,
जीवन में जो आलोक जगे। ॥५॥
परिचय :- सौ. निशा बुधे झा "निशामन"
पति : श्री अमन झा
पिता : श्री मधुकर दी बुधे
जन्म स्थान : इंदौर
जन्म तिथि : १३ मार्च १९७७
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
शिक्षा : बी. ए. इंदौर/बी. जे. मास कम्यूनिकेशन, भोपाल
व्यवसाय : एनला...



















